संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। व्यक्ति का संघर्ष और संकल्प दृढ़ हो तो भाग्य और परिस्थितियां बदल ही जाती हैं। ऐसी ही कहानी शहर की कांसापुर कॉलोनी निवासी एथलिट रोहित कुमार की है। कमजोर आर्थिक स्थिति और छोटी आयु में पिता का साया सिर से उठने के बाद भी रोहित ने परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेके। रोहित ने ऊंची कूद और दौड़ में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर संघर्षरत खिलाड़ियों के लिए मिसाल कायम की है।
कांसापुर कॉलोनी निवासी रोहित ने बताया कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति शुरू से ही खराब थी। पिता बचन सिंह रिक्शा चलाते थे। एक बड़ा भाई जो शारीरिक रूप से निशक्त है, तो कम आमदनी का बड़ा भाग भी उसके इलाज व देखरेख में चला जाता था। वहीं, छोटी बहन की परवरिश की जिम्मेदारी थी। परंतु उसे दौड़ने और खेलने का बहुत शौक और लगन थी।
रोहित ने बताया कि वर्ष 2011 में पिता की निधन हो गया। परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। वह मात्र 10 वर्ष का था, परंतु मां सुषमा देवी ने उसे कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। मां ने काम किया और उसे पढ़ाया और बड़े भाई की देखभाल करती रहीं। परंतु खेल में आगे बढ़ने के लिए उसे आर्थिक सहयोग की जरूरत थी, जो उसके पास परिवार से संभव नहीं था।
धीरे-धीरे पढ़ाई के साथ वह बढ़ता गया। वर्ष 2017 में वह खालसा कॉलेज में पहुंचा। कॉलेज की ओर से इंटरकॉलेज की ओर से प्रतियोगिता में भाग लिया। इस प्रतियोगिता में उसने ऊंची कूद में स्वर्ण पदक पाया। यहां से खेलों में भाग लेने की ललक और बढ़ गई। इसके बाद कॉलेज स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और पदक जीते।
एक प्रतियोगिता के जमना ऑटो इंडस्ट्रीज ने उसे आर्थिक सहयोग दिया और खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उसने इंटर कॉलेज स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उसका खेल देखकर एथलेटिक्स कोच चंद्रपाल राणा ने उन्हें तेजली खेल परिसर में अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया।
कोच चंद्रपाल राणा ने उन्हें प्रशिक्षित किया। इसके बाद उसने जिला, राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतें। 63वीं नेशनल ओपन एथलीट चैंपियनशिप बेंगलुरू में हुई। इस प्रतियोगिता में उसने 2.11 मीटर ऊंची कूद में कांस्य पदक जीता। यहां से उसका चयन साउथ एशियन गेम्स में हुआ। रोहित ने बताया कि उसका भारत में शीर्ष की रैंकिंग नंबर तीन है। वहीं, एशिया में शीर्ष 30 रैंकिंग में उसका नाम है। इसके अलावा वह 2025 राष्ट्रीय चैंपियन भी बना। उसका लक्ष्य ओलंपिक में खेलकर देश का नाम रोशन करना है।
ये हैं उपलब्धियां
2024 में गुवाहाटी में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स ऊंची कूद (2.11 मीटर) में स्वर्ण पदक। 2024 में चेन्नई, तमिलनाडु में अखिल भारतीय विश्वविद्यालय गेम्स ऊंची कूद (2.12 मीटर) में स्वर्ण पदक। सितंबर 2025 में रांची में ओपन नेशनल गेम्स ऊंची कूद (2.18 मीटर) में स्वर्ण पदक। अक्टूबर 2025 में झारखंड रांची में दक्षिण एशियाई चैंपियनशिप ऊंची कूद (2.15 मीटर) में रजत पदक।