वर्षों से प्रशिक्षकों (कोच) की कमी झेल रहे खेल विभाग को जल्द ही नए कोच
मिलने वाले हैं। विभाग की ओर से नए जूनियर कोचों की भर्ती प्रक्रिया शुरू
कर दी है।
इसमें प्रदेश भर से 511 नए कोच भर्ती होंगे। इन कोचों में से हर
जिले में 20 से 25 कोच आने की संभावना भी है। खेल कोचों को लेकर शुरू से ही
जिले की हालत पतली रही है। कई खेल तो ऐसे हैं कि आज तक जिले को उन खेलों
के कोच नसीब ही नहीं हुए हैं। इनमें कबड्डी, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, जूडो
कराटे का कोच आज तक तेजली खेल स्टेडियम को नहीं मिला है। इसके साथ ही एक
दर्जन के करीब अन्य खेल हैं।
इनका खेल विभाग के पास कोई कोच नहीं है। वहीं
हॉकी खिलाड़ियों को चार साल से कोच की दरकार है। इसके साथ ही हैंडबॉल का
कोच छह माह पहले रिटायर्ड हो चुका है। इसके बाद से हैंडबॉल कोच की भी
स्टेडियम से विदाई हो चुकी है। युवाओं का सबसे पसंदीद खेल कहे जाने वाले
क्रिकेट का कोच भी इन दिनों स्टेडियम में नहीं है। इसके साथ ही ब्लाक स्तर
पर बने राजीव गांधी स्टेडियम को शुरू से लेकर आज तक कोच नहीं मिल पाया है।
लेकिन अब उम्मीद जगी है कि कोचों की कमी जल्द ही दूर होगी और युवाओं को लाभ
पहुंचेगा। माना जा रहा है कि तीन से चार माह में कोचों की ज्वाइनिंग हो
जाएगी।
इन खेलों के इतने कोच होंगे भर्ती
कुश्ती के 85,
एथलेटिक के 50, खो-खो व कबड्डी के 45, बास्केटबाल के 35, वॉलीबॉल के 30,
हॉकी के 30, तैराकी के 28, बैडमिंटन के 20, बॉक्सिंग के 20, फुटबॉल के 20,
नेटबॉल के 20, जूडो के 15, जिम्नास्टिक के 12, लॉन टेनिस के 10, साइक्लिंग
के 12, तलवारबाजी के 7, ताइक्वांडो के 7, क्रिकेट के छह, शूटिंग के पांच,
टेबल टेनिस के पांच और 15 के करीब अन्य खेलों के जूनियर कोच भर्ती होंगे।
इसमें लाजिमी है कि जिले के हिस्से में 20 से 25 कोच तो आएंगे। जिसके बाद
जिला खेल विभाग प्रशिक्षकों से संपन्न हो जाएगा।
हॉकी का प्रशिक्षण दे रहे सीनियर खिलाड़ी
तेजली
खेल स्टेडियम में हॉकी का सबसे बड़ा ग्राउंड है और सबसे ज्यादा खिलाड़ी भी
इसी खेल के सुबह और शाम को अभ्यास करने आते हैं। लेकिन कोच की कमी को एक
सीनियर खिलाड़ी पूरी कर रहा है। हॉकी ग्राउंड में इस समय करीब 30 से 40
युवा अभ्यास करने आते हैं। लेकिन चार साल पहले कोच के समय यहां पर करीब 100
प्रतिदिन अभ्यास करने आते हैं। कोच के रिटायर्ड होने के बाद लगातार
खिलाड़ियों की संख्या घट रही है। इसके साथ ही वॉलीबाल के जो खिलाड़ी आते
हैं वे खुद ही अभ्यास करके चले जाते हैं। वॉलीबाल ग्राउंड में सालों से यह
क्रम चल रहा है।