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डेंगू ने मारा डंक, महिला और युवक की मौत

Fri, 25 Sep 2015 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
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जिले में दो डेंगू पीड़ितों की मौत हो गई है। इनमें जगाधरी निवासी एक महिला को डेंगू होने की पुष्टि हुई है, जबकि दूसरा पीड़ित एक पुलिस कर्मचारी का बेटा था। परिजनों के अनुसार उसे डेंगू बुखार था। इन मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हो गया है। वहीं डीसी ने ट्रामा सेंटर का औचक निरीक्षण कर डेंगू से निपटने के इंतजाम का जायजा लिया।
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जगाधरी के दुर्गा गार्डन की रहने वाली संतोष (50) संदिग्ध बुखार से पीड़ित थी। तीन दिन पहले जिले की सरकारी लैब में उसके रक्त की जांच के बाद उसे डेंगू बुखार होने की पुष्टि हुई थी। परिजनों ने संतोष को मुलाना मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था, जहां वीरवार को उसकी मौत हो गई। वहीं, पुलिस विभाग में एएसआई ऋषिपाल का परिवार अंबाला रोड स्थित पुलिस लाइन में रहता है।

ऋषिपाल के बेटे परमिंद्र (28) को कई दिन से बुखार था। परिजनों ने उसे यमुनानगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टर ने उसे डेंगू से ग्रस्त बताया था। परमिंद्र की हालत में सुधार न होने पर दो दिन पहले परिजन उसे पंचकूला के निजी अस्पताल ले गए, जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया लेकिन परिजन उसे मोहाली के मैक्स अस्पताल ले गए।
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यहां बुधवार को उसकी मौत हो गई। परमिंद्र की डेढ़ साल पहले शादी हुई थी। परमिंद्र और संतोष की मौत का पता चलने पर स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन पुलिस लाइन व दुर्गा गार्डन इलाके में फॉगिंग करवाई।

संतोष का नाम जिले के कंफर्म डेंगू पीड़ितों की लिस्ट में शामिल था। उसे डेंगू के साथ-साथ छाती में निमोनिया भी था। परमिंद्र का नाम हमारी लिस्ट में नहीं था। परिजन उसे डेंगू पीड़ित बता रहे हैं। मैक्स अस्पताल से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने पर ही पता चल सकेगा कि उसे डेंगू हुआ था या नहीं। पुलिस लाइन और दुर्गा गार्डन में फॉगिंग करवा दी गई है। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में आने वाले संदिग्ध बुखार पीड़ितों पर पूरी नजर रखी जा रही है। डेंगू की रोकथाम के लिए पूरे जिले में फॉगिंग कराई जा रही है। इसके लिए आठ छोटी मशीनें और एक बड़ी ट्रक वाली मशीन लगाई गई है।
डॉ. विजय गर्ग, सिविल सर्जन, जिला स्वास्थ्य विभाग

डीसी ने औचक निरीक्षण कर इंतजाम का लिया जायजा
जिले में दो डेंगू पीड़ितों की मौत के बाद डीसी डॉ. एसएस फुलिया ने वीरवार सुबह सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वार्डों के मरीजों से बातचीत की। डीसी ने विशेषकर ट्रामा सेंटर में बने डेंगू वार्ड का जायजा लेकर अधिकारियों व चिकित्सकों को दिशा-निर्देश दिए। डीसी ने सभी चिकित्सकों से अपने-अपने मुख्यालय पर रहने व नियमित तौर पर स्वास्थ्य/आशा कार्यकर्ताओं द्वारा अपने क्षेत्र में बुखार से पीड़ित व्यक्ति की रक्त पट्टिका बनाने के निर्देश दिए। साथ ही पॉजिटिव केस मिलने पर 24 घंटे में मरीज को रेडीकल ट्रीटमेंट देने और मरीज के घर के आसपास के 50 घरों में रक्त पट्टिका बनाने के आदेश दिए। उन्होंने अस्पताल में भर्ती डेंगू का इलाज करवा रहे मरीजों से भी बातचीत की।

सात कंफर्म, 33 संदिग्ध डेंगू के मरीज
सिविल सर्जन डॉ. विजय गर्ग ने बताया कि अब तक जिले में डेंगू के कुल 33 संभावित केस सामने आए हैं, जिनमें से सात केस पॉजिटिव पाए गए जिनका इलाज चल रहा है और स्थिति पहले से बेहतर है। अस्पताल में विशेष ब्लड कपोनेट स्परेटर मशीन है, जिसका इस्तेमाल डेंगू मरीज के खून को साफ करने के लिए किया जाता है। ऐसी मशीनें प्रदेश में सिर्फ दो-तीन अस्पतालों में उपलब्ध हैं। मशीन से मरीजों विशेषकर डेंगू मरीजों का इलाज करने में काफी सहायता मिल रही है।
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