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कभी स्कूली गेम्स जीतकर करती थी नाम रोशन, अब दीपिका को मिला अर्जुन अवार्ड

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deepika got arjuna award - फोटो : Yamuna Nagar
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जिलेवासियों और खेल प्रेमियों में उत्साह भर गया, जब उन्हें पता चला कि शहर की बेटी दीपिका ठाकुर का नामांकन अर्जुन अवार्ड के लिए हुआ है। नामांकन की सूचना मिलते ही परिजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों में भारी उत्साह है। मोहल्ले के लोग जश्न मना रहे हैं। दीपिका के बधाई देने वाला तांता लगा है। दीपिका की शादी करनाल में हुई है। वह फिलहाल वहीं हैं। नेशनल हॉकी टीम की उप कप्तान दीपिका ठाकुर रेलवे की कपूरथला वर्कशॉप में मुख्य अधीक्षक हैं। उनकी इस उपलब्धि से रेलवे के खिलाड़ियों, अधिकारियों व कर्मचारियों में भी भारी खुशी है। हर कोई दीपिका को कॉल कर बधाई दे रहा है। इसी तरह करनाल स्थित घर में भी लोग पहुंचकर बधाई दे रहे हैं।
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29 खिलाड़ियों को चुना गया
दीपिका ठाकुर भारतीय महिला हॉकी टीम की उपकप्तान दीपिका ठाकुर का नाम 2017 में भी अर्जुन अवार्ड के लिए चर्चा में था। लेकिन उस समय उन्हें यह सम्मान नहीं मिल पाया। इस बार खेल मंत्रालय की पुरस्कार चयन समिति ने दीपिका के नाम की सिफारिश अवार्ड के लिए की। दीपिका के साथ कुल 29 खिलाड़ियों के नाम भी हैं। जिन्हें अर्जुन पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
दीपिका ठाकुर का जन्म बेहद साधारण परिवार में हुआ। उनके स्वर्गवासी पिता राम नारायण ठाकुर यमुनानगर स्थित पेपर मिल में काम करते थे। जबकि मां ज्ञानती देवी गृहणी हैं। उनका बचपन पेपर मिल में ही व्यतित हुआ। बचपन से ही उन्हें खेल में रूचि थी। पेपर मिल के मैदान में खिलाड़ियों को देख अपने लक्ष्य के लिए रास्ता तैयार करती रहीं। स्कूल में ही उन्होंने हॉकी थाम ली थी। उन्हें हॉकी घूमाते व खेलते देख सभी ने उसे कॉचिंग व ट्रेनिंग दिलवाने की बात कही। जिसके बाद वे यमुनानगर में कोच दविंद्र साहनी के नेतृत्व में कोचिंग लेनी लगीं। आगे की पढ़ाई के लिए वे चंण्ड़ीढ़ चली गईं। यहां कोच जसविंद्र सिंह ने दीपिका को तैयार किया। इस दौरान उन्होंने कई डिस्ट्रिक, स्टेट और नेशनल मैच खेले और अपनी कुशलता साबित की। 2004 में वह पल आया जिसे दीपिका सहित परिजनों को बेसब्री से इंतजार था। दीपिका को अपनी मंजिल का पहला पड़ाव मिला और उनका चयन राष्ट्रीय टीम के लिए हुआ। इस बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर प्वाइंट पर फ्लो कर हिट करने का दम रखने वाली दीपिका 240 इंटरनेशनल मैच खेल चुकी हैं। जिसमें अधिकांश मैच भारतीय टीम ने अपने नाम किए।
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दीपिका ने अपने खेल से भारतीय महिला हॉकी को खास मुकाम तक पहुंचाया। वे भारतीय महिला हॉकी टीम की उप कप्तानी भी कर चुकी हैं। अपने 16 साल के करियर में उन्होंने हर मैच में अपना एक नया अंदाज पेश किया। इस दौरान उन्होंने विशेष उपलब्धियां भी प्राप्त की। दीपिका एशियन चैंपियनशिप में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और विजेता बनीं। वहीं जापान में हुई एशियन गेम्स में मेजबान टीम को रहा कर देश को कॉस्य पदक दिलवाया। 2016 में रियो ओलम्पिक गेम्स में दीपिका भारतीय टीम की उपकप्तानी कर चुकी हैं।
दीपिका यमुनानगर की बेटी हैं, तो वे करनाल की बहू हैं। 2017 में दीपिका की शादी करनाल निवासी विक्रम दहिया से हुई थी। विक्रम दिल्ली के सम्राट होटल में मैनेजर हैं। दीपिका का नामांकन अवार्ड के लिए होने की सूचना सबसे पहले पति विक्रम ने ही फोन पर उन्हें दी थी। राष्ट्रीय टीम में रहते हुए दीपिका ने 2007 में रेलवे ज्वाइन की। वे इस समय कपूरथला स्थित रेलवे कोच वर्कशॉप में चीफ अधीक्षक हैं। यह दीपिका की कौशलता को प्रमाणित करता है कि वे जॉब, खेल और दो परिवार पर एक साथ ध्यान दे रही हैं। उन्हें बहुत व्यवस्थित तरीके से निभा रही हैं।
दीपिका के साथ काम कर चुके इंटरनेशनल फुटबाल प्लेयर व रेलवे कर्मचारी पंकज चुघ ने बताया कि दीपिका को सम्मान देने पर सभी खुश हैं। वर्कशॉप में कर्मचारियों ने एक दूसरे का मुंह मीठा कर खुशी जताई। उन्होंने फोन कर दीपिका और उनके पति विक्रम को कॉल कर इसकी बधाई दी। पंकज ने कहा कि साथी के उपलब्धि से वे बेहद खुश हैं।
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