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Yamuna Nagar News: समयसीमा समाप्त, बाढ़ बचाव के काम अभी तक नहीं हुए पूरे

Tue, 30 Jun 2026 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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टापू कमालपुर में अधूरा पड़ा बाढ़ बचाव राहत कार्य। संवाद
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राजेश कुमार
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यमुनानगर। जिले में बाढ़ बचाव कार्यों की धीमी रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग को 30 जून तक सभी राहत कार्य हर हाल में पूरे करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा तक भी अधिकांश संवेदनशील स्थलों पर कार्य अधूरे हैं।
इस वर्ष बाढ़ से बचाव के लिए जिले में 47 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 38 स्थानों पर स्टड निर्माण, सुरक्षा तटबंध मजबूत करने, वायर क्रेट लगाने और कटाव रोकने के कार्य किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर 60 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो पाया है, जबकि कुछ जगहों पर अभी केवल पत्थरों की पैमाइश और स्टैकिंग का कार्य ही चल रहा है। जिले में यमुना, सोम और पथराला नदियों के करीब 152 किलोमीटर क्षेत्र में 18 प्रमुख स्थानों पर बाढ़ बचाव कार्य किए जाने हैं।
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हथनीकुंड बैराज से गुमथला तक यमुना नदी की लंबाई करीब 70 किलोमीटर है, जबकि सोम नदी 42 किलोमीटर और पथराला नदी लगभग 40 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है। यमुनानगर जिला बाढ़ की दृष्टि से प्रदेश के सबसे संवेदनशील जिलों में जाता है। हर वर्ष यमुना, सोम और अन्य बरसाती नदियों का जलस्तर बढ़ने से खेतों के साथ-साथ यमुना से सटे गांव भी प्रभावित होते हैं।
भूमि कटाव के कारण कई किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है। साढौरा, जगाधरी, यमुनानगर और रादौर विधानसभा क्षेत्रों के अनेक गांव हर वर्ष बाढ़ की मार झेलते हैं, जिनमें जगाधरी और रादौर क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहते हैं।
टापू कमालपुर जैसे सबसे संवेदनशील क्षेत्र, जहां पिछले दो वर्षों से सबसे अधिक कटाव हो रहा है, वहां अभी तक निर्माण कार्य पूरी गति नहीं पकड़ पाया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। गांव टापू के विकास राणा, भानू प्रताप व अन्य का कहना है कि अभी तक पत्थर बाहर ही पड़े हैं। वह कब नदी पर लगेंगे। इस बार तो यह लापरवाही गांव को डूबो कर रहेगी। ठेकेदार कहता है कि उसने 15 सितंबर तक का समय ले रखा है।
पहले 15 और फिर 30 तक का दिया समय : तीन जून को डीसी प्रीति ने अधिकारियों की बैठक में 15 जून तक बाढ़ बचाव कार्य पूरे करने के निर्देश दिए थे। बाद में 26 जून को समीक्षा बैठक में उन्होंने सिंचाई विभाग को 30 जून तक हर हाल में सभी कार्य पूरे करने के आदेश दिए। इसके बावजूद अधिकांश साइटों पर कार्य अधूरा रहने से प्रशासनिक तैयारियों और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। संवाद
इन गांवों में बाढ़ आने का सबसे ज्यादा खतरा
जिले के मालीमाजरा, नवाजपुर, लाक्कड़, लेदी, बेलगढ़, टापू कमालपुर, औधरी, लापरा, बीबीपुर, मांडेवाला, खानूवाला, आंबवाली, टिब्बड़ियां, काटरवाली, रामपुर गेंडा, रणजीतपुर, भंगेड़ा, मलिकपुर, मुजाफत, नगली, प्रलादपुर, पौबारी, संधाला, संधाली, लालछप्पर, मॉडल टाउन करेहड़ा, उन्हेड़ी और गुमथला सहित दर्जनों गांव हर वर्ष बाढ़ के खतरे से प्रभावित होते हैं।
बाढ़ बचाव राहत कार्यों की समीक्षा की गई थी, जिसमें 30 जून तक सभी काम पूरे करने थे। सभी एसडीएम को अपने एरिया में मौके पर जाकर जांच करने को कहा था। यदि कहीं काम पूरे नहीं होंगे तो रिपोर्ट लेकर एजेंसी पर कार्रवाई की जाएगी। -प्रीति, डीसी, यमुनानगर।
एक ही एजेंसी को सौंपी कई परियोजनाओं की जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बाढ़ राहत कार्यों में देरी का एक बड़ा कारण एक ही एजेंसी को कई परियोजनाओं का जिम्मा सौंपना भी माना जा रहा है। एक साथ कई साइटों पर काम शुरू होने के कारण एजेंसी किसी भी स्थान पर समय पर कार्य पूरा नहीं कर सकी। इसका असर अब मानसून से ठीक पहले साफ दिखाई दे रहा है।
वहीं भगेड़ी, बागपत, मुजाफत कलां और पोबारी सहित कई स्थानों पर ग्रामीणों के आरोप हैं कि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। पत्थरों में मिट्टी मिलाई जा रही है, छोटे आकार के पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है तथा वायर क्रेट बांधने के लिए जंग लगी तारों का इस्तेमाल हो रहा है। जहां 18 किलो के पत्थर लगाए जाने चाहिए, वहां दो से चार किलो तक के लगाए जा रहे हैं है, जो बहाव में टिक नहीं पाएंगे।
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वहीं 27 जून को रादौर के एसडीएम नरेंद्र सिंह ने गांव पोबारी में चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पत्थरों की गुणवत्ता और मात्रा की जांच की तथा धीमी प्रगति पर ठेकेदार को फटकार लगाई। मौके पर छोटे पत्थर मिलने पर उन्हें अलग करने के निर्देश भी दिए। पोबारी गांव यमुना नदी से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए यहां मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जाती है। वहीं खानूवाला गांव के लोग पिछले वर्ष की बाढ़ को आज भी नहीं भूले हैं।
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