संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। धान कटाई के साथ ही खेतों में फसल अवशेष (पराली) जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस साल में अभी तक एक ही मामला गांव हड़तान माजरी में ही सामने आया है। इसी कड़ी में डीसी पार्थ गुप्ता मंगलवार को किसानों के बीच गांव मुकारबपुर व अंबली गांव में पहुंचे। मुकारबपुर जब उन्होंने खेत में फसल अवशेष देखे तो खुद ट्रैक्टर चलाकर फसल अवशेष से रोल बेलर बनाया।
डीसी गुप्ता गांव मुकारबपुर में किसान जगजीत सिंह से मिले। किसान से पूछा कि वह धान कटाई के बाद फसल अवशेषों का क्या करते हैं। जगजीत सिंह ने बताया कि वह अवशेषों से रोल बेलर बनाकर उन्हें बेचते हैं। इस पर डीसी ने कहा कि वह भी रोल बेलर बनाकर देखना चाहते हैं। डीसी ट्रैक्टर पर सवार हो गए और कृषि यंत्र चलाकर रोल बेलर बनाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन का संदेश दिया।
डीसी ने फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले उद्यमी रमनदीप वालिया से कृषि यंत्रों एवं उनसे बनने वाले रोल बेलर व स्केयर बेलर के बारे विस्तार से जानकारी ली। रमनदीप वालिया ने बताया कि इस वर्ष उनका लक्ष्य है कि कृषि यंत्रों के माध्यम से लगभग 35 हजार टन धान के अवशेषों का स्केयर बेलर व रोल बेलर बनाकर उन्हें संबंधित कंपनियों में भेजे जाएं।
इसके अलावा कृषि यंत्रों से बने धान के अवशेषों के स्केयर बेलर व रोल बेलरों का स्टॉक भी जमा किया जाता है ताकि उन्हें आगे आने वाले समय में कंपनी को बेचा जा सकें। डीसी ने फसल अवशेष से बने रोल बेलर व स्केयर बेलर भंडारण का भी निरीक्षण किया।
डीसी पार्थ गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में पराली न जले, इसके लिए सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं। पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए पराली प्रोटेक्शन फोर्स का गठन भी किया गया है। फसल अवशेष न जलाए जाने के लिए भी संबंधित विभागों की टीमें बनाई गई है। यदि कोई किसान पराली जलाएगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। धान के अवशेषों का सही प्रबंधन करने के लिए कृषि विभाग से संपर्क करें।
अनुदान पर ले सकते हैं कृषि यंत्र : आदित्य प्रताप
कृषि उप निदेशक आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि धान के अवशेषों का अधिकांश हिस्सा खेत की मिट्टी में ही मिला दिया जाता है। शेष धान के अवशेषों का स्केयर बेलर व रोल संबंधित कंपनियों में भेज दिया जाता है। सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।