बिलासपुर के कपालमोचन में कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाले राज्यस्तरीय मेले में अधूरे पड़े शौचालयों के निर्माण से दिक्कतों से दो-चार होना पड़ सकता है। सप्ताह भर में मेले का आगाज हो रहा है, किंतु अभी भी शौचालयों निर्माण का काफी काम बाकी है। जबकि अधिकारियों से हुई मीटिंग में ठेकेदार ने डीसी से 450 शौचालय कंप्लीट और बाकि 150 शौचालयों का 28 अक्त्तूबर तक निर्माण कर देने की बात की थी। किंतु आलम ये है कि अभी एक भी शौचालय पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हो पाया है और करीब 375 शौचालयों का निर्माण कार्य जारी है। हालात का जायजा लेने पर पाया कि जिन शौचालयों पर कार्य जारी है, उन पर अभी तक न तो शटरिंग हुई है और न ही पानी व उनमें आने-जाने के रास्ते की सुविधा हो पाई है। इसके अलावा गड्ढों से निकली मिट्टी को भी अब तक समतल नहीं किया गया। इस कारण शौचालयों के आसपास मिट्टी के ढेर लगे हैं और शौचालयों के समीप पत्थर बिखरे पड़े हैं।
बता दें कि इस बार राज्यस्तरीय कपालमोचन मेले के लिए करीब 600 हाइटेक शौचालय बनाए जाने हैं। इनके निर्माण के लिए मेला प्रशासन की ओर से 22 सितंबर को ठेका दिया गया था। ठेके की शर्त के अनुसार उक्त सभी शौचालय का निर्माण कार्य 30 अक्तूबर तक पूरा करना था। गत दिनों प्रशासनिक अधिकारियों की मीटिंग में ठेकेदार ने डीसी से कहा था कि 450 शौचालय तैयार कर दिए हैं, जबकि बाकि 150 शौचालय वह 28 अक्त्तूबर तक तैयार कर देगा। ठेकेदार आश्वासन के मुताबिक 28 अक्तूबर और ठेके की शर्त अनुसार 30 अक्तूबर की डेट भी निकल गई, किंतु शौचालयों का निर्माण नहीं हो पाया। मौके पर जायजा लेने पर पाया कि 375 शौचालयों का निर्माण कार्य चल रहा है, जिनमें से कोई भी अभी पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हो पाया है।
इन स्थानों पर बनाए जाने हैं शौचालय:
मेला प्रशासन की ओर से करीब सौ शौचालय डीएवी स्कूल के पास, 64 शौचालय पुलिस लाइन के पास, 64 शौचालय चौराही रोड के पास, 64 शौचालय रविदास मंदिर के सामने, 50 सर्कस ग्राउंड के पास व अहड़वाला स्कूल के पीछे और 50 शौचालय आदिबद्री में बनाए जाने हैं। सप्ताहभर में कपालमोचन मेले का आगाज होगा, किंतु कुछ स्थानों पर शौचालयों के लिए अभी तक महज गड्ढे ही बनाए गए हैं। इनमें कपालमोचल से अहडवाला गांव जाने वाले मार्ग पर कोई शौचालय नहीं, बिलासपुर से कपालमोचन तक दो किलोमीटर के एरिया में कोई शौचालय नहीं, किसी भी पार्किंग के पास कोई शौचालय नहीं, मछरौली रोड पर कोई शौचालय नहीं बन पाया है। ऐसे में मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को दिक्कतों से दो-चार होना पड़ सकता है।
सरोवरों के भी दयनीय हालात, पानी से ज्यादा काई और घास-
सरोवरों में पानी भरने और शौचालयों के निर्माण में से एक भी कार्य तय समय होने के बावजूद पूरा नहीं किया गया। सबसे अधिक दयनीय स्थिति ऋण मोचन सरोवर की है, जहां ठेकेदार ने आनन-फानन में सरोवर की साफ-सफाई कर उसमें पानी भर दिया है। इस कारण सरोवर में गंदगी, कटी हुई घास और काई ऊपर आ गई है। कपालमोचन और ऋण मोचन सरोवर में पानी पूरा नहीं भरा गया है और मेले के आयोजन में मात्र पांच दिन शेष हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं के स्नान करते वक्त पैर फिसलने से अप्रिय घटना हो सकती है। इसी तरह कपालमोचन सरोवर के महिला व वीआईपी घाट पर जाने वाली सीढ़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। उनकी मरम्मत किए बिना ही उन पर सफेदी करा दी गई है। कपालमोचन सरोवर पर अधिकतर महिला श्रद्धालु इन्हीं सीढ़ियों से स्नान करने के लिए घाट में पहुंचती हैं। उधर, ऋणमोचन सरोवर के महिला घाट पानी की कमी के चलते हुए सूखे पड़े हैं।
-क्या कहते हैं ठेकेदार-
शौचालय निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार गौरव गुप्ता ने कहा कि उन्होंने 550 शौचालय कपालमोचन व 50 शौचालय आदिबद्री में तैयार करने हैं, जिन पर कार्य तेजी से जारी है और पांच नवंबर तक सभी शौचालयों पर सीट लगा दी जाएगी। समय से पहले शौचालय तैयार कर दिए जाएंगे।
मेले के लिए 600 शौचालय बनाए जाने हैं। मेला शुरू होने से पहले हर हालत में सभी शौचालय बना दिए जाएंगे।
नवीन आहुजा, मेला प्रशासक व एसडीएम बिलासपुर।