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मौत के कुएं के खेल जैसा ताजेवाला-लालढांग का सफर

Fri, 18 Dec 2015 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
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  जिले की हिमाचल प्रदेश से लगती सीमा पर ताजेवाला से लालढांग तक का करीब 12 किलोमीटर सफर मौत के  कुएं के खेल जैसा लग रहा है। मार्ग के बीच छह जानलेवा तीव्र मोड़ हैं, इनमें से एक-आध पर ही पूर्व सूचना बोर्ड लगा है। जबकि अन्यों पर वाहन चालक को अचानक मोड़ का पता चलता है।
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इस कारण वाहन अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। फोग सीजन में हादसों की संभावना अधिक बढ़ जाती है। बीते वर्षों में भी दिसंबर-फरवरी के बीच धुंध व मार्ग पर यातायात प्रबंध अधूरे होने के कारण दर्जनों हादसों में कई लोग अकाल मौत का ग्रास बने तो कई घायल हुए। हादसों के ग्राफ को देखते हुए संबंधित विभाग को हादसों से सबक लेना चाहिए था, किंतु ऐसा नहीं हो पाया। इस बार भी फॉग सीजन दस्तक दे चुका है, किंतु मार्ग पर ढेरों खामियां ज्यों की त्यों हैं।

बता दें कि एनएच-73ए (जगाधरी-पावंटा) के इस मार्ग से हरियाणा से हिमाचल व यूपी से ट्रैफिक आता-जाता है। देहरादून, पांवटा साहिब, मंसूरी, नाहन, चकरौता जैसी जगहों पर जाने के लिए भी लोग इसी रास्ते से गुजरते हैं। बावजूद इसके ताजेवाला चांदसौत बैरियल से आगे की दोनों ओर गड्ढे व सड़क के किनारे टूटे हैं और बर्म भी गायब है।
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इन्हीं खामियों के बीच भी कई बार चालक वाहन से नियंत्रण खो देते हैं व खुद व दूसरों को हादसे की चपेट में ले लेते हैं। संबंधित विभाग ने निर्माण के बाद सड़क किनारों के मरम्मत व बर्म लेवल सही करने सहित सुरक्षित यातायात के प्रबंधों को लेकर ध्यान नहीं दिया। आलम यह है कि ताजेवाला से आगे लालढांग तक की सड़क की दोनों साइड क्षतिग्रस्त हैं और यातायात प्रबंध भी अधूरे हैं।

पग-पग पर जान का खतरा, सुरक्षा के नहीं कोई इंतजाम
ताजेवाला से लालढांग तक करीब 12 किलोमीटर के सफर के बीच यातायात प्रबंध न के बराबर ही हैं। मार्ग पर सिर्फ सेंटर लाइन खींची गई है, जबकि पैज (सड़के के किनारों पर दोनों तरफ) लाइन पूरी तरह मिट गई हैं या फिर फीकी पड़ गई हैं।

इसके अलावा मार्ग पर कैट आई, ब्लिंकर व स्पीड लिमिट सूचक जैसे ट्रैफिक कंट्रोल डिवाइसिस भी नहीं हैं। मार्ग से दोनों ओर कहीं साथ में पेड़ सटे हैं तो कहीं जगह-जगह गहरी खाई हैं। इन पेड़ों से टकराने व अनियंत्रित होकर खाई में गिरने के कई हादसे हो चुके हैं।

 यही नहीं मार्ग पर आठ नंबर जैसे व अंग्रेजी के यू की बनावट जैसे कई मोड़ हैं। इनमें सबसे खतरनाक लालढांग मोड़ है, जहां बीते वर्षों में कई सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। आसपास कोई आवासीय क्षेत्र व रोशनी का प्रबंध न होने से रात में मार्ग पर घुप अंधेरा छा जाता है।

यह मार्ग पहाड़ी व जंगली क्षेत्र में लगता है, इस कारण कई बार जानवर सड़क पर आ जाते हैं। भूख-प्यास लगने पर जंगली जानवर अचानक मार्ग पर बिलकुल सामने आ जाते हैं। इससे अनियंत्रित होकर या जानवरों की टक्कर से कई बार वाहन चालक चोटिल हो जाते हैं।

ग्रामीण बुलाने लगे खूनी मोड़, प्रशासन अभी भी है मौन
फैजपुर निवासी प्रमोद, विक्रम, कलेसर निवासी बलबीर चौधरी, प्रदीप चौधरी, रविंद्र कुमार का कहना है कि फॉग सीजन में हर वर्ष ताजेवाला से लालढांग के बीच काफी सड़क हादसे होते हैं।

इनमें अधिकांश तीव्र मोड़ों पर हुए, जिस कारण ग्रामीण इन्हें खूनी मोड़ बुलाने लगे हैं। किंतु मार्ग के हालात देख लगता है कि प्रशासन अभी मौन है।

तीन राज्यों को जोड़ने के कारण मार्ग पर 24 घंटे वाहनों की आवाजाही रहती है, बावजूद इसके मार्ग के किनारे क्षतिग्रस्त हैं और जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं। इसके अलावा बर्म भी गायब है, जिससे सड़क व साथ लगते कच्चे रास्ते के लेवल में काफी अंतर आ गया है।

इन बिंदुओं पर अमल जरूरी
मार्ग के सभी तीव्र मोड़ों के दोनों ओर कुछ दूरी पहले उनके पूर्व सूचना बोर्ड लगे होने चाहिए।
मार्ग के दोनों ओर जहां खाई हो, वहां स्पोटर (बाउंड्रीवाल) व खतरे का संकेतक लगा होना चाहिए।
मार्ग के गड्ढों सहित क्षतिग्रस्त किनारे व बर्म के लेवल को सही किया जाए।


जंगली व पहाड़ी क्षेत्र से सटे मार्ग के किनारों पर जाल लगाया जाए, ताकि जानवर व पत्थर सड़क पर न आए।
मार्ग पर जगह-जगह कैटआई, सेंटर व पैजलाइन और रेट्रो रिफ्लेक्टर सूचना बोर्ड व संकेतक लगे हों।

बीते वर्ष दिसंबर में हुई चार लोगों की मौत व छह घायल
पिछले वर्ष 2014 में दिसंबर माह में धुंध के मौसम में दो अलग-अलग सड़क हादसों में एक ही परिवार के छह लोग घायल हो गए थे। जबकि चांदसौत बैरियर के समीप कार दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा बीते छह माह में मार्ग पर सड़क दुर्घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि स्कूली दर्जनों बच्चे व अन्य लोग घायल हुए।

इनमें कलेसर से आगे लालढांग पर पटियाला की स्कूल बस व ट्रैक्टर की टक्कर हुई। इसमें दर्जनों बच्चे घायल हुए और दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि हथनीकुंड मोड पर कैंटर पलटने से चालक और परिचालक को गंभीर रूप से चोटें आईं। इसके अलावा गांव फैजपुर के पास ट्रक की टक्कर से बाइक सवार तीन लोग घायल हुए, इसमे एक महिला की मौत हो गई और अराईयां वाला गांव के नजदीक तीन हादसे हुए जिनमें एक टांग टूटी व दो गंभीर घायल हुए।

वर्जन
मार्ग पर यातायात को सुरक्षित व सुगम बनाने संबंधित प्रबंध किए जाएंगे। इसके लिए एस्टिमेट बना लिया गया है और टेंडर होने हैं। जल्द ही मार्ग पर जहां जो भी कमी है, उसे पूरा कर लिया जाएगा।
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गजल कुमार, एसडीओ, एनएचएआई।
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