यमुनानगर। ‘साहब, बरसाती पानी की निकासी न होने से करीब 70 एकड़ धान व सब्जी की फसल खराब होने के कगार पर है। बरसात होने के बाद से खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। हमारे खेतों के गोहर में पाइप डलवाया जाए।’ यह गुहार बुधवार को लघु सचिवालय में आए रादौर क्षेत्र के गांव फतेहगढ़ माजरा गांव के लोगों ने डीसी को शिकायत देकर लगाई।
ग्रामीण गोपाल दास, बलजीत सिंह, सरजीत सिंह, धर्मसिंह, रामशरण, श्याम सिंह, गुरनाम सिंह, जयसिंह, कर्मचंद, बीर सिंह, सुखबीर, चुन्नीलाल, संजय, अमन कुमार, निर्मल अभिषेक आदि ने डीसी को दी शिकायत में बताया कि वे अपने गांव में खेती बाड़ी करके अपने परिवार का गुजारा कर रहे है। गांव में उनकी करीब 70 एकड़ है। जिस पर वे धान व सब्जी की फसल उगाते हैं।
गांव की खसरा नंबर 330 जमीन में पंचायती गोहर का रास्ता है। 2009 में पंचायत ने यह गोहर जमीन के लेवल से करीब चार फुट ऊंचा कर पक्का कर दिया। जिसकी वजह से खेतों से बरसाती पानी की निकासी बंद हो गई। 2009 के बाद हर साल बरसाती सीजन में उनकी फसल खराब हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान को लेकर बीते वर्ष भी शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की गई थी।
अब तक कई बार उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लिखित में शिकायत देकर समस्या के समाधान कराने की मांग की। इस बार भी आई बरसात ने उनकी फसल निकासी न होने से पानी में डूबी हुई है। जिससे उनकी फसल खराब होने के कगार पर है। उन्होंने मांग की कि गोहर के नीचे पाइप डाल कर खेतों से बरसाती पानी की निकासी की जा सकती है।
शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं :
ग्रामीणों ने बताया कि अगस्त 2013 में उन्होंने बीडीपीओ रादौर का इस समस्या के समाधान के लिए लिखित में शिकायत दी थी, इसके बाद उन्होंने डीसी व संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायत दी, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। जिसके चलते उनमें प्रशासन के प्रति रोष है।
बन रहे कर्जदार :
किसानों ने बताया कि फसल खराब होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। बैंक व आढ़ती के पास ब्याज में पैसे लेकर वे जमीन में फसल लगाते है। लेकिन पानी की निकासी ना होने के कारण उनकी फसल बर्बाद हो जाती है। जिस कारण वे बैंक और आढ़ती के कर्जदार बन रहे हैं।