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संस्कार मनुष्य के जीवन का सार : निर्मल दास

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- कपाल मोचन गुरु रविदास मंदिर डेरा बाबा लाल दास
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संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में कपाल मोचन गुरु रविदास मंदिर डेरा बाबा लाल दास सहित खंड के विभिन्न गांवों में बाबा साहेब की जयंती पर अनेक कार्यक्रम हुए। समाजसेवी एवं पंचायत अधिकारी विजयंत नेहरा ने डेरा बाबा लाल दास कपालमोचन में पहुंच कर मौजूदा गद्दीनशीन संत श्री निर्मल दास व अन्य संत महापुरुषों की वाणी श्रवण करने व गुरु जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
बिलासपुर, ऊधमगढ़ व ग्राम ककड़ौनी में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विजयंत नेहरा ने बाबा साहेब के जन्मदिन की उपस्थित गुरु प्रेमियों को बधाई दी। उन्होंने बाबा साहेब को नमन करते हुए कहा गया कि बाबा साहेब दलितों, शोषितों व नारियों के मुक्तिदाता थे।
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कपाल मोचन स्थित गुरु रविदास मंदिर डेरा बाबा लाल दास में गद्दी नशीन महंत निर्मल दास, खजांची अमरनाथ ज्ञासड़ा, मा. रमेश, इंद्रराज, रामकिशन व समाज के कई गांवों से आई संगत को संत निर्मल दास ने कहा कि शिक्षा मनुष्य के जीवन का सबसे कीमती तोहफा है, जो व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है। वहीं संस्कार मनुष्य के जीवन का सार हैं। अच्छे संस्कारों द्वारा ही मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण और विकास होता है और जब मनुष्य में शिक्षा और संस्कार दोनों का विकास होगा, तभी वह परिवार, समाज और देश का विकास कर सकेगा।
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