यमुनानगर। किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक खेती की ओर भी ध्यान दे रहे हैं। वहीं पॉपुलर की खेती इन दिनों किसानों के लिए फायदे का साधन बनती जा रही है। कम समय में बेहतर आय देने वाली यह फसल किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान कर रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पॉपुलर का पेड़ पांच से सात साल में तैयार हो जाता है और इसकी मांग प्लाईवुड उद्योग, फर्नीचर, पेपर मिलों और निर्माण क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है।
यमुनानगर सहित आसपास के जिलों में बड़े पैमाने पर पॉपुलर आधारित उद्योग स्थापित हैं, जिसके कारण किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बाजार की चिंता नहीं रहती। किसानों के अनुसार पॉपुलर की खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि खेती के दौरान भी किसान अपनी जमीन पर गेहूं, चारा, दालें जैसी अंतर फसली खेती कर सकते हैं। इससे दोहरी आय का मौका मिलता है। इसके अलावा पॉपुलर की देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान है। समय-समय पर सिंचाई और आवश्यक खाद देने से पेड़ तेजी से बढ़ता है।
रोग-कीट का प्रकोप अन्य पेड़ों की तुलना में कम देखा जाता है। सरकारी स्तर पर भी किसान भाइयों को पोपुलर की खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। कृषि विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर खेती की तकनीक और बाजार की जानकारी उपलब्ध करा रहा है। किसानों को पौधरोपण, दूरी, छंटाई और मार्केटिंग की सही जानकारी मिलने से उनकी लागत कम हो रही है और मुनाफा बढ़ रहा है।
किसान मनीष, प्यारे लाल, मंदीप, राम सिंह, करण सिंह आदि बताते हैं कि एक एकड़ में करीब 400–450 पौधे लगाए जाते हैं और कटाई के समय प्रति पेड़ 800 से 1500 रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस तरह एक एकड़ से लाखों रुपये की आय संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि पापुलर आने वाले वर्षों में किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। आमतौर पर पॉपुलर की पौध की कीमत वैरायटी के हिसाब से तय किया जाता है।
गन्ने के खेत में खड़े पोपुलर के पेड़। संवाद