श्री कृष्ण सेवा समिति यमुनानगर-जगाधरी व जिओ गीता परिवार द्वारा दिव्य गीता सत्संग का रसपान कराते हुए दूसरे दिन महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने बताया कि सत्संग से ही मन को शांति मिल सकती है। भागवत गीता सत्संग से ही ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। भगवान कृष्ण ने कुरुक्षत्र की धर्म भूमि पर पूरी मानवता को गीता का उपदेश दिया।
उन्होंने कहा कि अर्जुन तो हर समय सोते जागते अपने गोविंद पर दृष्टि जमाये रखता था। पर युद्ध के आरंभ में अर्जुन का बदला हुआ रूप हमने देखा। अर्जुन की आंख के आंसू निकल रहे है और वह अपनी स्थिति से विचलित है शोक में डूब गया है। अर्जुन की स्थिति विसाद ग्रस्त है। आज पूरे विश्व की दशा भी ऐसी है किसी भी देश को देख लो अर्जुन की तरह डिप्रेशन का शिकार है। स्वामी ने बताया कि विश्व के पास इसका कोई इलाज नहीं। विज्ञान के पास भी इसका कोई हल नही है। विज्ञान ने हमें बहुत कुछ दिया पर शांति नहीं दे पाया। शांति केवल गीता का संदेश ही दे सकता है। गीता जीवन का गीत है। उन्होंने कहा कि अनुकूलता अहंकार को न जगाये विनम्रता आये यही गीता सिखाती है।
इस अवसर पर रतन रसिक झिंझाना व रसिक पवन द्वारा गाये भजनों अगले जन्म में कान्हा बनाना मुझे बंसुरिया, प्रीता तेरे नाल लगाईंयां ओ सांवरे आँखा तेरे नाल लगाईयां ओ सांवरिया, श्याम रंग दे तु मेरे को अपने रंग में, अर्जुन तो बहाना है इस गीत ज्ञान के लिये पर श्रद्धलुओं ने खूब आनंद उठाया। इस अवसर पर स्वामी वासुदेव अतुल जोशी जी महाराज, विधायक घनश्याम दास, अमरनाथ बंसल, भारत भूषण बंसल, जितेंद्र गुप्ता, राम निवास गर्ग, राकेश त्यागी, अनिल छाबड़ा, वर्षा, अशोक पपनेजा, मुकेश मित्तल व सोनू आदि मौजूद थे।