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जिले के रजिस्टर्ड अस्पताल में नहीं किया जाएगा महिलाओं का गर्भपात

Fri, 03 Feb 2017 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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यमुनानगर - फोटो : यमुनानगर
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जगाधरी वर्कशाप। जिले के रजिस्टर्ड अस्पताल में अब डाक्टर गर्भपात नहीं करेंगे। जिले के 22 रजिस्टर्ड डॉर्क्ट्स (गाइनोक्लोजिस्ट) ने गर्भपात न करने का फैसला लिया है।
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जिमखाना क्लब में आयोजित पत्रकारवार्ता में आईएमए के जिलाध्यक्ष डा. डीके सोनी, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डा. राजन शर्मा , पूर्व  जिलाध्यक्ष डॉ विक्रम भारती व डॉ जितेंद्र चड्डा ने इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मग्गो अस्पताल पर पीएनडीटी एक्ट के तहत हुई कार्रवाई के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने यह निर्णय लिया है। इसकी जानकारी सीएमओ को भी दे दी गई है। अस्पताल में गर्भपात के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को सिविल अस्पताल में रेफर किया जाएगा। इसके बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हुई तो सख्त कदम उठा जाएंगे। जिसमें अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड भी नहीं किए जाएंगे और डाक्टर भी हड़ताल पर जा सकते हैं। साथ ही प्रदेश स्तर पर भी इस मामले को उठाया जाएगा। मौके पर डा.ईवीएस रवि, डा. महेंद्र मेहता, डा. रंगी लाल गर्ग, डा. संजीव कुमार, डा. प्रदीप तहलान, डा. नरेंद्र कश्यप, डा. अमित गोयल, डा. विपिन गोयल, डा. दीपिका, डा. सुमन मसीह, डा. ममता गोयल, डा. सुनीला सोनी व डा. विशाल मौजूद रहे।
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स्वास्थ विभाग की कार्रवाई पर ये उठाए सवाल:
आईएमए से जुड़े डाक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर कई सवाल उठाए हैं और कार्रवाई को बिल्कुल गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि पीएनडीटी और एमटीपी एक्ट  में अंतर है। एमटीपी एक्ट में कार्रवाई सीएमओ के नेतृत्व में होती है, जबकि मग्गो अस्पताल में कार्रवाई पीएनडीटी इंचार्ज के नेतृत्व में हुई। मग्गो अस्पताल गर्भपात के लिए रजिस्टर्ड है। इसी तरह पीएनडीटी एक्ट के तहत भी केस नहीं बनता है, क्योंकि महिला 11 सप्ताह की गर्भवती थी। इस समयावधि में भ्रूण के लिंग का नहीं पता चलता। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अस्पताल में गर्भपात के लिए कई औपचारिकताएं पूरी नहीं की गई थी, जो कि गलत है। क्योंकि औपचारिकताएं पूरी करने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल में आ गई। अस्पताल की ओर से उस समय गर्भपात की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की गई थी। इसके अलावा विभाग के पास कोई भी पुख्ता साक्ष्य नहीं है, सिर्फ डिकोय के बयान पर ही पूरी कार्रवाई कर दी गई।
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डॉक्टर्स का पक्ष भी नहीं सुना:
मग्गो अस्पताल पर कार्रवाई के बाद आईएमए सदस्यों ने 25 जनवरी को एडीसी से मिल कर उन्हें ज्ञापन सौंपा था। जिसमें डॉक्टर का पक्ष सुनने की मांग रखी थी। आईएमए सदस्यों ने बताया कि उसके बाद भी विभाग ने डॉक्टर का पक्ष नहीं सुना और डाक्टर के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया। यह पूरी तरह से गलत है। आईएमए इस कार्रवाई का विरोध करती है।
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ये रखी हैं मांगें:
-डाक्टर के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द की जाए-
-गिरफ्तारी और मानहानि से मुक्त होकर डॉक्टर्स को काम करने की आजादी मिले, जिससे डाक्टर अपने मुख्य काम पर ध्यान लगा सके।
-हम अपराधी नहीं हैं, हमें सम्मान के साथ काम करने दिया जाए।
-कन्या भ्रू्ण जांच के खिलाफ हम सरकार के साथ है, मगर हमें इसमें सहयोगी बनाया जाए।
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क्या है मामला:
बीती 24 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग ने मग्गो अस्पताल पर एक गर्भवती महिला को डिकोय बनाकर भेजा था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल में महिला का गर्भपात किया जाने लगा था, लेकिन ऐन वक्त पर विभाग की टीम पहुंच गई। उधर, डाक्टर का कहना था कि अस्पताल गर्भपात के लिए रजिस्टर्ड है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पूरी तरह से गलत है। इस मामले में अगले दिन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एडीसी डॉ शलीन से मिलकर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को गलत बताया और डाक्टर का पक्ष भी सुनने की मांग की गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने ऐडवाइजरी कमेटी बनाई और कमेटी ने पांच दिन इस पर चर्चा की। जांच व विभागीय निष्कर्ष के बाद  29 जनवरी को इस मामले की शिकायत पुलिस में दी गई और पुलिस ने दो महिला डाक्टर्स समेत पांच लोगों के खिलाफ पीएनडीटी व एमटीपी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
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