फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दोस्त की हत्या के दोषी दो लोगों को उम्रकैद

Wed, 25 Nov 2015 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
विज्ञापन
विज्ञापन
मामूली कहासुनी में न्यू आबादी कैंप निवासी राजेश डावर की हत्या करने के दोषी गांव गौसगड सिकंदरपुर थाना गंगोह जिला सहारनपुर के अली हसन और मोहम्मद रासिद को कोर्ट ने उम्रकैद तथा 52 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के दौरान 21 लोगों की गवाही हुई।
विज्ञापन


संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था राजेश
13 अगस्त 2014 को न्यू आबादी कैंप थाना फर्कपुर निवासी राजेश डावर संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। फर्कपुर पुलिस ने 14 अगस्त को राजेश की पत्नी पूनम डावर की शिकायत पर अज्ञात पर अपहरण का केस दर्ज किया था। पूनम ने पुलिस को शिकायत दी थी कि वह एक निजी स्कूल में प्राध्यापिका है। 13 अगस्त को उसका पति राजेश घर से बाइक पर सवार होकर बाहर गया था, जो शाम तक वापस नहीं लौटा। आसपास तथा रिश्तेदारियों में तलाश करने के बावजूद उनका कहीं कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने पूनम की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ भादंसं की धारा 365 के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।

गांव पतासगढ़ के पास मिला था राजेश का शव
15 अगस्त 2014 को सदर यमुनानगर पुलिस को सूचना मिली थी कि पतासगढ़ के पास सफेदों के पेड़ों के बीच एक बाइक खड़ी है। साथ ही पानी में एक लाश पड़ी हुई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। गहन पड़ताल के बाद पता चला कि शव कैंप निवासी राजेश डावर का है। फर्कपुर पुलिस ने पहले से दर्ज केस में हत्या की धारा 302 को जोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक शव से कुछ दूरी पर ताश की दो डिब्बी, एक खाली बोतल शराब व दो खाली गिलास भी पड़े मिले। 16 अगस्त को पुलिस ने बीपीएस जीएमसी खानपुर सोनीपत में शव का पोस्टमार्टम कराया।
विज्ञापन


संदीप की गवाही पर काबू किए हत्यारे
गांधीनगर निवासी गवाह संदीप कुमार ने पुलिस को बताया कि उसने राजेश की बाइक पर कैंप पर किराए पर रहने वाले अली हसन तथा मोहम्मद रासिद को नहर पटरी की ओर जाते देखा था। अली हसन व मोहम्मद रासिद रादौर रोड पर रेहड़ी लगाते हैं। पुलिस ने जब राजेश की कॉल डिटेल खंगाली, तो पाया कि अली हसन के मोबाइल पर काफी संख्या में कॉल की गई है। 18 अगस्त को पुलिस ने दोनों आरोपियों को काबू कर लिया। पुलिस पूछताछ के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि 13 अगस्त को उन्होंने लोहे कीदरांती से राजे के सिर पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। अली हसन ने मृतक की जेब से 20 हजार रुपये निकाले, जिनमें से कुछ रुपयों से अपने कपड़े और अन्य सामान खरीद लिया। पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके उपरांत मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश संदीप गर्ग की कोर्ट ने अली हसन तथा मोहम्मद रासिद को राजेश डावर की हत्या का दोषी करार देते हुए भादंसं की धारा 302 में उम्रकैद तथा 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि 201 में दो साल कठोर कारावास तथा एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें