मामूली कहासुनी को लेकर जानलेवा हमला करने के तीन दोषियों को कोर्ट ने तीन-तीन साल कैद 19 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के दौरान दर्जन भर लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।
यह था मामला : शहर यमुनानगर पुलिस को 18 जून, 2014 को टेलीफोन के जरिए सूचना मिली थी कि निरंकारी भवन के सामने एक दफ्तर के बाहर गोली चली है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस को दी शिकायत में गांव बहादुरपुर निवासी विनय कांबोज ने बताया कि वह निरंकारी भवन के सामने सचिन पंडित के दफ्तर के बाहर अपने साथी रविंद्र, भंवर सिंह राणा व अन्य के साथ खड़ा था। इस दौरान पुराना हमीदा निवासी काबल अपने साथी मंगू के साथ कार में वहां से गुजरा।
जब उसने उन्हें कार रोकने का इशारा किया, तो उन्होंने वाहन को रोक दिया। बातचीत के दौरान किसी बात को लेकर उसकी काबल व उसके साथी से बहस हो गई। आरोप है कि मंगू ने उस पर फायर कर दिया और मौके से भाग गए।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का दौरा किया तथा भदंसं की धारा 336, आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने इस केस में भादंसं की धारा 307 को भी जोड़ दिया। 21 जून 2014 को कृष्णा कॉलोनी पुराना हमीदा निवासी सुखप्रीत व पुराना हमीदा निवासी काबल ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने इस मामले के तीसरे आरोपी प्रेम नगर निवासी त्रिभवन को भी काबू कर कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के उपरांत दर्जन भर लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग की कोर्ट ने सुखप्रीत, काबल व त्रिभवन को विनय कांबोज पर जान लेवा हमला करने का दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल कैद तथा पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुना दी। जबकि आर्म्स एक्ट में कोर्ट ने सुखप्रीत व काबल को एक साल कैद तथा दो हजार रुपये जुर्माना किया है।