यमुनानगर। दशमेश कॉलोनी निवासी तेजपाल ने नगर निगम की पूर्व मेयर सरोज बाला, पूर्व पार्षद अजय कुमार, तत्कालीन जगाधरी तहसीलदार समेत 14 लोगों पर धोखाधड़ी व जालसाजी का केस दर्ज कराया है। तेजपाल का आरोप है कि उसके दो भांजों ने इन अधिकारियों के साथ मिलकर उसके 182 गज के प्लाट के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर रजिस्टरी तैयार करवाई। निगम की पूर्व मेयर व पार्षद पर मिलीभगत करके तसदीक कर एसेस्मेंट तैयार करवाने और उस एसेस्मेंट के आधार पर तहसीलदार द्वारा रजिस्टरी तैयार करवाने का आरोप है। लगभग एक साल तक शिकायतें देने के बाद भी पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने पर पीड़ित ने कोर्ट में याचिका डाली। जिसके बाद कोर्ट ने मामले में पूर्व मेयर सरोज बाला, पार्षद अजय कुमार, जगाधरी तहसीलदार, तहसील जगाधरी के नंबरदार अजमेर सिंह, नंबरदार नरेंद्र कुमार, फर्जी एसेस्मेंट तैयार करने वाला नगर निगम का संबंधित कर्मचारी, फर्जी सैलडीड पर फर्जी कागजात तैयार कर लोन देने वाला संबंधित बैक कर्मचारी, रजिस्ट्रार कार्यालय जगाधरी का संबंधित कर्मचारी, पीड़ित तेजपाल के भांजे हेमंत कुमार, भूपेंद्र कुमार, न्यू आबादी कॉलोनी निवासी विनय मनचंदा, आजाद नगर निवासी सोमनाथ, मैहलावाली निवासी मेजर सिंह, यशपाल वधवा पर केस दर्ज करने के आदेश दिए। शनिवार देर शाम को पुलिस ने इन आरोपियों पर केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
दशमेश कॉलोनी में खरीदे थे दो प्लाट :
दशमेश कॉलोनी निवासी तेजपाल ने बताया कि उसने गोबिंदपुरी कॉलोनी निवासी प्रयागराज से दशमेश कॉलोनी में दो प्लाट खरीदे थे। जिसमें एक प्लाट की रजिस्टरी 16 जनवरी 1987 को अपने नाम करवा ली थी। उसके बाद 182 गज के दूसरे प्लाट की फुल एंड फाइनल पेमेंट देकर 25 नवंबर 1994 को खरीद लिया था और कब्जा भी ले लिया था। लेकिन प्रयागराज की मौत होने के कारण उस प्लाट की रजिस्टरी उसके नाम नहीं हो पाई थी। इसके बाद उसने उस प्लाट पर एक कमरा व बाथरूम बनाया और अपने परिवार सहित इस जगह पर रहने लगा। तब से वह उसका हाउस टैक्स व अन्य टैक्स भी अदा करता आ रहा है। आज भी उस प्लाट पर उसका कब्जा है। कब्जा होने के कारण प्लाट का एसेस्मेंट भी उसके ही नाम हो गई थी। जिसका प्रॉपर्टी आइडी नंबर भी उसको मिल गया था।
भांजों ने पूर्व मेयर व पार्षद से तसदीक करवाई एसेस्मेंट :
तेजपाल ने बताया कि दशमेश कॉलोनी निवासी हेमंत कुमार व भूपेंद्र कुमार उसकी बहन के लड़के है। आरोप है कि इनकी नियत शुरू से ही उसका प्लाट हड़पने की थी। आरोपियों को जब पता चला कि प्रयागराज की मौत हो गई है और उसके कोई वारिश नहीं है तो ये उसकी प्रॉपर्टी को हड़पने का षडयंत्र रचने लगे। दोनों आरोपियों ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर 13 मार्च 2014 को उसका नाम कटवाकर धोखाधड़ी से अपने नाम करवा ली। आरोप है कि यह एसेस्मेंट आरोपियों ने पूर्व पार्षद अजय कुमार व पूर्व मेयर सरोज बाला से मिलीभगत व फर्जीवाड़ा कर तसदीक करवा ली। इसके बाद आरोपियों ने उस समय के तहसीलदार जगाधरी, पूर्व पार्षद व पूर्व मेयर की मिलीभगत व अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर एसेस्मेंट के आधार पर फर्जी तसदीक रिपोर्ट बनाकर धोखाधड़ी से दो हस्तातरणनामा तैयार करवाया। जिसमें दो बराबर हिस्सों में मलकियत आरोपियों ने अपने नाम करवा ली।
मेयर व पार्षद की फर्जी रिपोर्ट देख कर तहसीलदार ने बिना जांच किए रजिस्टरी कर दी :
तेजपाल का आरोप है कि उसकी प्रॉपर्टी की मलकियत आरोपियों ने अधिकारियों व कर्मचारियों को घूस देकर तैयार करवाई है। जो कि पूरी तरह से मिलीभगत, धोखाधड़ी व जालसाजी कर की गई। क्योंकि रिकार्ड अनुसार इसका मालिक आज भी प्रयागराज चला आ रहा है और मौके पर उसका कब्जा है। यह रजिस्टरी, तहसीलदार जगाधरी द्वारा पिछली मलकियत व कागजात की जांच किए बिना केवल मात्र आरोपी पार्षद व मेयर की फर्जी तसदीक व रिपोर्ट पर की गई है। इस हस्तातरणनामा में दोनों आरोपी भाईयों ने पार्षद व मेयर के साथ फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाई और फर्जी रिपोर्ट के आधार पर यह हस्तांतरणनामा तैयार किया गया है।
फर्जीवाड़ा कर अन्य व्यक्ति को बेचा प्लाट, बैंक कर्मियों से मिलकर प्रॉपर्टी पर लिया लोन :
तेजपाल ने बताया कि फर्जीवाडा कर रजिस्टरी बनवाने के बाद उसके भांजों ने उसकी प्रॉपर्टी को न्यू आबादी कैंप निवासी विनय मनचंदा को बेच दी। आरोपी विनय मनचंदा ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर उसकी प्रॉपर्टी पर लोन भी ले लिया। जो आज तक नहीं भरा गया। लोन देते समय भी बैंक कर्मचारियों ने पिछली मलकियत के कागजातों को चेक नहीं किया और आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी कागजात व फर्जी रिपोर्ट तैयार करके लोन दे दिया। इस लोन को देने में भी कई लोग शामिल है।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी, लेकिन नहीं मिली :
तेजपाल ने बताया कि जब उन्हें आरोपियों की नियत और फर्जीवाड़े का पता चला तो उन्होंने इस धोखाधड़ी के बारे में पुलिस को शिकायत दी। लेकिन पुलिस ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की। पिछले एक साल से उन्होंने दर्जनों शिकायतें दी। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई न हुई। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत पूछा कि नगर निगम के अधिकारियों से उसकी एसेस्मेंट को किस आधार पर बदला और किस आधार पर आरोपी हेमंत व भूपेंद्र के नाम पर एसेस्मेंट दर्ज की गई। लेकिन आज तक नगर निगम की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। इससे फर्जीवाड़ा और मिलीभगत साबित होती है।
छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक 20 लोगों के शामिल होने की आशंका :
तेजपाल ने बताया कि इस फर्जीवाड़े का अंजाम देने में यशपाल वधवा का अहम रोल है। जो पेशे से खुद को पत्रकार बताता है। आरोप है कि आरोपी वधवा ने उनको धमकी भी दी थी कि तुझे जायदाद से बाहर निकाल दूंगा और तुझे जान से मार दूंगा। तेजपाल ने बताया कि उसकी प्रॉपर्टी के रिकार्ड के अनुसार इसकी कीमत लगभग 40 लाख रुपये है। इस जायदाद को हड़पने के लिए छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों में लगभग 20 लोग शामिल है। जिन्होंने घूस लेकर उसकी प्रॉपर्टी के फर्जी कागजात तैयार किए।
मामले की पूरी जांच हो, दोषियों को सजा मिले : साहब सिंह
पीड़ित तेजपाल के वकील साहब सिंह गुर्जर का कहना है कि तहसील व नगर निगम कार्यालय में प्लॉट के कागजात तैयार करवाने का बड़ा गोलमाल सामने आ रहा है। तेजपाल के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं। क्योंकि बड़े लोगों से मामला जुड़ा हुआ। कोर्ट से तेजपाल को इंसाफ मिला है। इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
हमने कभी किसी के साथ गलत नहीं किया। जो भी डॉक्यूमेंट तसदीक होते थे, पूरी जांच के बाद होते थे। यदि किसी कर्मचारी ने गलत किया है तो नगर निगम द्वारा उसकी जांच करवाई जानी चाहिए। उनपर लगाए आरोप बेबुनियाद व झूठे है। वे हर जांच के लिए तैयार है।
- सेवा सिंह, पूर्व मेयर सरोज बाला के पति।
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने कार्रवाई की है। मामले में पूर्व मेयर समेत 14 लोगों के नाम है। सभी पर केस दर्ज कर लिया है। मामले की गहनता से जांच की जाएगी। जांच के बाद ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- रतन लाल, एसएचओ, थाना शहर यमुनानगर।