यमुनानगर।
बिजली निगम में दो युवकों ने यूपी से आईटीआई के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर नौकरी हासिल कर ली। 2012 से दोनों आरोपी एएलएम पद पर नौकरी कर रहे थे। एसडीओ द्वारा जब उनके प्रमाणपत्रों की जांच की गई तो वह फर्जी मिले। जिसके बाद एसडीओ ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
बिजली निगम के एसडीओ विशाल सैनी ने शहर पुलिस को शिकायत दी है कि सरकार द्वारा वर्ष 2012 में एचएसएससी के तहत बिजली निगम में विभिन्न पदों पर आवेदन मांगे थे। जिसमें आईटीआई में इलेक्ट्रिशियन ट्रेड की योग्यता रखी गई थी। जिसके बाद अक्तूबर माह में भर्ती की गई। इसमें शिवपुरी निवासी पवन वागले भी एएलएम पद पर लगा था। इसके बाद विभागीय आदेशों पर कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच शुरू की गई। पवन वागले के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए यूपी के रोजगार एवं ट्रेनिंग डायरेक्टर को लिखा गया। वहां से जांच के लिए यह पत्र सत्या आईटीआई सहारनपुर को भेजा गया। वहां से आईटीआई प्रबंधन ने रिपोर्ट भेजी कि उनके यहां पर इलेक्ट्रिशियन ट्रेड है ही नहीं। तो उनके संस्थान से कोई कैसे इलेक्ट्रिशियन का प्रमाणपत्र ले सकता है। इस तरह से पाया गया कि जो आईटीआई से इलेक्ट्रिशियन का सर्टिफिकेट वागले ने दिया, वह फर्जी है। इसी तरह एएलएम विकास के प्रमाणपत्रों की जांच की गई तो उसका सर्टिफिकेट भी फर्जी मिला। 19 अक्तूबर 2012 से आरोपी निगम से मिलने वाले वेतन व अन्य सुविधाओं को लाभ ले रहा थे। जांच में दोनों कर्मियों के प्रमाणपत्र फर्जी मिलने पर शिकायत शहर पुलिस को दी गई। शहर पुलिस ने एसडीओ विशाल सैनी की शिकायत पर आरोपी पवन व विकास पर धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
शहर एसएचओ थाना रतन लाल का कहना है कि मामले में केस दर्जकर लिया गया है। जांच की जा रही है। जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।