खिजराबाद ताजेवाला में अवैध खनन करने वालों के खिलाफ प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। मंगलवार को एसडीएम के निर्देश पर खिजराबाद के नायब तहसीलदार भारत भूषण, सिंचाई विभाग के धर्मपाल और माइनिंग इंस्पेक्टर राजेश की संयुक्त टीम ने यमुना के आरएलएसडीई बांध का निरीक्षण किया। यहां बड़े स्तर पर अवैध खनन में स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों के शामिल पाएं जाने पर अब इनके खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। जिससे माइनिंग माफिया में हड़कंप मच हुआ है और उन्होंने ताजेवाला समेत अन्य स्थानों से अवैध स्क्रीनिंग प्लांट व स्टोन क्रशर को उखाड़ना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही अवैध स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांटों पर तैयार माल को हटाया जा रहा है। मंगलवार को तीन स्क्रीनिंग प्लांट मशीनरी उठा ले गए। ताकि आगामी जांच के दौरान ये पता न चल सके कि अवैध खनन किसने करवाया और इसे कहां पर खपाया गया।
अवैध माइनिंग को लेकर हाईकोर्ट सख्त
यमुनानगर में अवैध माइनिंग को लेकर विशाल बंसल की तरफ से हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाली हुई है। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अधिकारियों से तीन महीने में जवाब तलब किया है। इसी केस में बिलासपुर डीएसपी की तरफ से कोर्ट को बताया गया था कि मार्च 2011 से लेकर 31 मार्च 2019 तक अवैध माइनिंग के 487 केस दर्ज किए गए हैं।
मंगलवार को दिनभर फील्ड में रही टीम
चुहड़पुर कलां में अवैध खनन में संलिप्त दो वाहनों को पकड़कर खिजराबाद थाने में भेजा गया। उधर, बेलगढ में भी अवैध खनन बड़े स्तर पर चल रहा है, लोग बेलगढ़ में भी ताजेवाला जैसी कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। चुहड़पुर कलां में बडे पैमाने पर अवैध खनन का कार्य चल रहा है। यहां कृषि योग्य भूमि अवैध खनन करने वालों ने सैंकडों फीट तक खोद डाली है। चुहडपुर कलां में भी खनन विभाग
ने छापा मारकर एक जेसीबी और एक ट्रैक्टर को पकड़ा और कार्यवाही करते हुए वाहनों को खिजराबाद थाने में खड़ा करवा दिया।
लंबे समय से हो रहा है अवैध खनन
ताजेवाला में माइनिंग माफिया द्वारा लंबे समय से अवैध खनन करवाया जा रहा है। यहां बाढ़ रोकने के लिए बनाएं गए आरएलएसडीई बांध को भी नहीं छोड़ा गया और बांध की तरफ 50 फीट तक के गहरे गड्ढे खोद दिए गए। माइनिंग माफिया के इस काम में सहयोग देने वाले 14 स्क्रीनिंग प्लांट और 1 क्रशर के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश से इनके संचालकों में हड़कंप हैं। इनमें से अधिकतर विभिन्न पार्टियों से जुड़े नेताओं के बताएं जा रहे हैं। आरोप हैं कि इनके संचालक ही अवैध खनन की सामग्री को अपने प्लांट पर लाकर रेत, बजरी, कोरसेंट और बजरपुर बनाकर आगे सप्लाई करते थे। इतने समय से प्राकृतिक संपदा और राष्ट्रीय धरोहर के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन खनन, सिंचाई, प्रदूषण और पुलिस विभाग के अधिकारी चुप बैठे रहे। जब हथिनीकुंड बैराज को खतरा नजर आया तो अधिकारियों की नींद टूटी है।
यमुना के अंदर भी माइनिंग
रिवर बैड माइनिंग की वजह से 2010 में लाल टोपी घाट कम पानी में ही टूट गई थी और फिर इसकी मरम्मत के कि लिए सिंचाई विभाग ने 2011 से 2013 तक करीब 34 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे। अब लालटोपी घाट के दायं और बाएं दोनों तरफ खतरनाक स्तर तक अवैध माइनिंग हो चुकी है। जिससे खतरा और बढ़ गया है। लालटोपी घाट के लेफ्ट साइड यमुना बहती है और राइट साइड में कृषि योग्य भूमि में अवैध खनन की वजह से 50 फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं। ऐसे में यमुना में जलस्तर बढ़ते ही सारा पानी हरियाणा साइड में पहुंच जाएगा और बड़ी तबाही मचाएगा। यह यह क्षेत्र इको फारेस्ट जोन में शामिल है। जिस पर वजह से किसी भी तरह का खनन नहीं हो सकता ।
इन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांटों के खिलाफ शिकायत
-फ्रेंड्स स्क्रीनिंग प्लांट, आरएसके, ताज, इसरान, अनमोल, गुरू कृपा, मेहता, राहीमिंग, हारून, नाजी फतेह, बंसल, आयान,मन्नौर क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट, एवन और अनिल स्क्रीनिंग प्लांट की शिकायत दी है। हालांकि खनन विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर यहां चल रहे 10 स्क्रीनिंग प्लांट और क्रशरों के खिलाफ प्रताप नगर थाना पुलिस ने 27 फरवरी को भी एफआइआर दर्ज करवाई थी।