खनन के लिए ठेकेदारों ने उतारी पॉक लाइन मशीनें, बांध बनाकर बदला जा रहा पानी का रास्ता
- किसानों ने किया विरोध शुरू, बोले नहीं करने देंगे कोई भी गलत काम
- किसानों के विरोध को देखते हुए ठेकेदारों ने घाटों पर रखे हथियारों से लैस बाउंसर
यमुनानगर/रादौर।
किसानों के विरोध के बावजूद गुमथला क्षेत्र में न केवल खनन माफिया बल्कि खनन ठेकेदारों ने भी यमुना के किनारों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है । नियम कायदों को ताक पर रखकर पानी में पॉकलाइन जैसी भारी भरकम मशीनों को उतार खनन के लिए बहाव को बदला जा रहा है। प्रशासन भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। तय योजना के मुताबिक किसानो ने एक बार फिर से इसका विरोध करते हुए उन्हें रोकने का भी प्रयास किया, लेकिन खनन ठेकेदारो द्वारा घाट पर किए जा रहे खनन कार्य में किसी भी प्रकार की रुकावट को रोकने के लिए पहले से ही प्रबंध किए गए थे। किसानों की माने तो ठेकेदार ने हथियारों से लैस कुछ बाउंसर घाट पर बैठा दिए है। उधर किसानों ने भी मामले में किसी प्रकार से अपने कदम पीछे न हटाने की चेतावनी ठेकेदार व प्रशासन को दे डाली है। देर रात तक इसी मामले पर किसानो की बैठक भी होने जा रही है। जिसमें किसान रेत ठेकेदार की इस दादागिरी से निपटने की आगामी रणनीति भी तैयार करेगें।
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पानी के बहाव बदलने से होता है नुकसान
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किसान बलविन्द्र सिंह, विनोद, अमरजीत, जितेन्द्र इत्यादि ने बताया कि सुबह के समय किसानो को सूचना मिली थी कि रेत ठेकेदार ने गुमथलाराव घाट पर यमुनानदी के पानी के बहाव को बदलना शुरू कर दिया है। ताकि किनारो की साथ लगती भूमि पर खनन कार्य किए जा सके। जो कि नियमो के पूरी तरह से विपरीत है। ठेकेदार ऐसा नहीं कर सकता। पानी का बहाव बदले जाने से ही यमुनानदी में इस वर्ष भूमि कटाव की समस्या अधिक पनपी है। जिसका किसान विरोध कर रहे है। लेकिन हैरत की बात तो यह है कि लगातार हो रहे विरोध के बावजूद नियम खुलेआम टूट रहे है, न स्थानीय अधिकारी और न ही जिले का कोई अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहा है। आज सुबह भी किसानो ने पूरे मामले की सूचना सिंचाई विभाग व खनन विभाग के अधिकारियों को दी थी लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जिससे रेत के ठेकेदारो द्वारा पानी का बहाव बदलने के लिए बनाए जा रहे तटबंध का कार्य लगातार जारी रहा।
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दादागिरी से नहीं डरेगे किसान, नहीं जागा स्थानीय प्रशासन तो सूबे के मुखिया का खटखटाएंगे दरवाजा
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किसान मजदूर संघर्ष समिति अध्यक्ष अधिवक्ता वरयामसिंह ने कहा कि क्षेत्र के किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है। लेकिन रेत ठेकेदार उन्हें बर्बाद करने पर तुले हुए है। नियमो के विपरीत लगातार खनन किया जा रहा है। लेकिन अधिकारी आंखें बंद कर चुके है। शिकायत के बाद भी किसानो की सुनवाई नहीं हो रही है। अब बात दादागिरी तक आ पहुंची है। अपने हको की लड़ाई लड़ रहे किसानो की आवाज को दबाने व किसानो में भय का माहौल बनाने के लिए हथियारबंद लोगो को भी घाट पर छोड़ा गया है लेकिन किसान भी डरने वाला नहीं है। वैसे भी किसान रेत ठेकेदारों की नियमों के विपरीत किए जा रहे खनन से बर्बादी की तरफ ही बढ़ रहा है। ऐसे में किसान बर्बाद होकर भूखा मरने की बजाए अपने हकों के लिए लडक़र मरना अधिक पसंद करेगा। अधिकारी जो आंखे बंद किए बैठे है उनकी शिकायत भी अब सूबे के मुख्यमंत्री से की जाएगी। किसान जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले से अवगत करवाएगें।
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सिंचाई विभाग के अधिकारी बोले, नियम टूटने पर सबसे पहले कार्रवाई उनकी, लेकिन खनन विभाग देगा रिर्पोट
-मामले को लेकर सिंचाई विभाग के एसडीओ मनीष देसवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अगर रेत ठेकेदार नियमों के विपरीत कार्य कर रहा है तो उनका विभाग सबसे पहले इस पर कार्रवाई करेगा। लेकिन उसके लिए उन्हें खनन विभाग से रिपोर्ट लेनी होगी। उन्हें मामले की सूचना मिली थी जिसके बाद उन्होंने खनन विभाग के अधिकारियों को फोन से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। कल पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी।
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कोई शिकायत नहीं मिली-ओमदत्त
खनन विभाग की ओर से ओमदत्त ने कहा कि उन्हें सुबह से किसी की कोई शिकायत नहीं मिली है। जांच के बाद ही कुछ कह सकते है। अगर पानी से किनारों को नुकसान पहुंच रहा है तो कुछ हद तक पानी का बहाव बदला जा सकता है। ठेकेदार अगर पानी का बहाव बदलने का प्रयास कर रहा है तो ऐसा क्यों किया जा रहा है इसकी जांच करवाएंगे।
फोटो : ़21 व 22