पंचायती राज विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग के जूनियर इंजीनियर नरेश कुमार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगाधरी ने रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार दिया है। दोषी को पीसी एक्ट की धारा-7 के तहत एक साल कैद और 5000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त कैद होगी। जबकि पीसी एक्ट की धारा-13 के तहत दो साल की सजा व दस हजार रुपये की सजा दी गई। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त कैद होगी।
राज्य चौकसी ब्यूरो यमुनानगर उपकेंद्र के इंचार्ज निरीक्षक सतनारायण ने बताया कि नरेश कुमार को बापोली निवासी गौरव कुमार की शिकायत पर विजिलेंस यमुनानगर ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि गौरव कुमार निवासी बापोली ने ग्राम पंचायत बिलासपुर से स्ट्रीट लाइट लगवाने का ठेका लिया था। इसका एस्टीमेंट बनवाने के बदले जेई नरेश कुमार ने 5000 रुपये की रिश्वत मांगी।
17 जनवरी 2014 को उक्त शिकायत पर विजिलेंस यमुनानगर ने थाना राज्य चौकसी ब्यूरो पंचकूला में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज करके कार्रवाई शुरू की। दोषी ने शिकायतकर्ता को पहले अंबाला फिर कुरुक्षेत्र व अंत में करनाल अपने घर बुलाया। विजिलेंस द्वारा जोधाराम नायब तहसीलदार अंबाला, शौडो गवाह संजय कुमार को टीम में डीसी के आदेश से शामिल किया।
नियमानुसार कार्रवाई करते हुए दोषी को करनाल से 5000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जांच उपरांत दिनांक 28 अगस्त को चालान माननीय न्यायालय जगाधरी में प्रस्तुत किया गया। लगभग 11 माह की ट्रायल उपरांत दिनांक 27 जुलाई 2015 को न्यायालय के संदीप गर्ग अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगाधरी ने जेई नरेश कुमार को दोषी घोषित कर सजा सुनाई।