शादी का झांसा देकर नाबालिग का अपहरण करने के दोषी को कोर्ट ने 10 साल कैद तथा 14 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब सवा साल चली सुनवाई के दौरान 18 लोगों की गवाही हुई।
यह था मामला : पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार फरकपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली एक कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने 25 अप्रैल, 2014 को पुलिस को शिकायत दी थी कि उसके पड़ोस में हरि बंगाली रहता है। जिसके पास प्रेम नगर निवासी सचिन का आना-जाना है। 24 अप्रैल की रात को परिवार के सभी लोग खाना खाकर सो गए। सुबह जब वह उठा, तो उसने अपनी 14 साल की नाबालिग बेटी को लापता पाया। शिकायतकर्ता ने शक जाहिर किया कि सचिन कुमार ने उसकी बेटी का अपहरण किया है। पुलिस ने सचिन के खिलाफ भादंसं की धारा 363 व 366 के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
करनाल से बरामद हुई थी नाबालिग : 13 मई, 2014 को यमुनानगर पुलिस को इस केस में सफलता हाथ लग गई और उसने करनाल से नाबालिग को बरामद कर लिया। उस समय आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया। 23 सितंबर को पुलिस ने सचिन को काबू कर लिया। पूछताछ के दौरान सचिन ने बताया कि 24-25 अप्रैल की अल सुबह चार बजे वह कमानी चौक पर खड़ा था।
इसी दौरान हरिदास तथा उसकी पत्नी सुचरिता, पीड़िता (नाबालिग) को ऑटो में बैठा कर वहां ले आए। जिसके बाद वह नाबालिग को लेकर करनाल चला गया, जबकि उपरोक्त दोनों को वापस भेज दिया। करनाल पहुंचने पर उसने एक कमरा किराए पर लिया और नाबालिग के साथ वहां रहना शुरू कर दिया। उसने कई बार नाबालिग के साथ गलत काम भी किया। इसी बीच उसने अपनी पत्नी को फोन करके करनाल बुला लिया। तीनों कुछ दिन तक एक ही कमरे रहे। कुछ दिन के बाद वह पीड़िता को लेकर सहारनपुर चला गया। वहां भी उसने लड़की के साथ गलत काम किया। जब पुलिस को भनक लगी कि नाबालिग लड़की उसके पास करनाल में हैं, तो वह मौका पाकर फरार हो गया।
3/4 पॉक्सो एक्ट में सुनाई 10 साल की सजा
कोर्ट में करीब सवा साल चली सुनवाई के दौरान 18 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने प्रेम नगर निवासी सचिन को नाबालिग का अपहरण करने का दोषी करार देते हुए अपना फैसला सुना दिया। जबकि उसकी पत्नी सुचरिता को बरी कर दिया। कोर्ट ने सचिन को भादंसं की धारा 363 व 366 में पांच-पांच साल कैद तथा दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि 3/4 पॉक्सो एक्ट तथा 5 (1) पॉक्सो में 10-10 साल कैद तथा पांच-पांच हजार रुपये ुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। उपरोक्त सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।