संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर की सड़कों से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी जिस नगर निगम पर है, उसी के सामने हालात सबसे ज्यादा बेकाबू नजर आ रहे हैं। यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम कार्यालय के बाहर से ही अतिक्रमण की शुरुआत हो जाती है, जो व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
शहर की जिन सड़कों को यातायात के लिए खुला और सुरक्षित होना चाहिए था, वे अब दुकानों, स्टोर और अवैध पार्किंग में तब्दील हो चुकी हैं। नगर निगम से लेकर वर्कशॉप रोड, मधु रोड और रादौर रोड तक हालात एक जैसे हैं। दुकानदारों ने सड़क किनारे ही नहीं, बल्कि सड़क के बीच तक अपना सामान फैला रखा है।
कई जगह फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुके हैं, जिससे पैदल चलने वालों को मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वहीं बाजारों में पार्किंग की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण वाहन चालक सड़कों पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, जिससे जाम आम बात बन चुकी है
सुबह से शाम तक इन मार्गों पर यातायात रेंगता नजर आता है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहन भी जाम में फंस जाते हैं। कई बार मामूली दूरी तय करने में आधा घंटा तक लग जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
इसके बावजूद नगर निगम की कार्रवाई कागजों और दावों तक ही सीमित नजर आती है। नगर निगम द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान जरूर चलाए जाते हैं, लेकिन वे स्थायी समाधान देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। कुछ दिन के लिए सड़कें साफ दिखती हैं और फिर वही दुकानों का फैलाव, वही अव्यवस्थित पार्किंग और वही जाम। इससे यह सवाल उठता है कि क्या निगम की कार्रवाई केवल दिखावा बनकर रह गई है।
शहरवासी, अशोक, मलकीत सिंह, राम प्रकाश व जयराम का कहना है कि जब तक अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती से और लगातार कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे। बाजारों में व्यवस्थित पार्किंग विकसित करना और नियमों का सख्ती से पालन कराना अब जरूरत बन चुका है। जिम्मेदारी निभाने वाले ही जब लापरवाही बरतेंगे, तो शहर की सड़कों से अराजकता खत्म होना मुश्किल है।
अतिक्रमण को लेकर हमारा लगातार फोकस है। सड़कों पर अतिक्रमण न हो इसके लिए अधिकारियों को दिशा- निर्देश दिए हुए हैं। पार्किंग की व्यवस्था के लिए योजना बनाई जा रही। -सुमन बहमनी, मेयर, यमुनानगर जगाधरी नगर निगम।