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Yamuna Nagar News: अस्पताल से कुत्ते पकड़ने में निगम ने झाड़ा पल्ला

Tue, 07 May 2024 05:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिला नागरिक अस्पताल में लावारिस कुत्तों ने मरीजों व डॉक्टरों की नाक में दम कर दिया है। वहीं अस्पताल से कुत्तों को पकड़ने में नगर निगम ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि उनके पास कुत्तों की नसबंदी कराने के लिए कोई बजट और पकड़ने के लिए स्टाफ भी नहीं है।
जिला नागरिक अस्पताल में बड़ी संख्या में लावारिस कुत्ते घूमते हैं। अस्पताल में कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा मरीजों को सुबह-शाम भोजन, रस, दूध दिया जाता है। कई बार मरीजों के तीमारदार पसंद न आने पर भोजन को अस्पताल परिसर में ऐसे ही खुले में फेंक देते हैं। जिसे बाद में कुत्ते खा लेते हैं। भोजन व अन्य खाद्य पदार्थ अस्पताल में आसानी से मिलने लगे हैं इसलिए कुत्तों ने यहीं अपना बसेरा बना लिया है।
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जब कुत्तों को कुछ खाने को नहीं मिलता तो वह यहां उपचार के लिए आए मरीजों के पीछे भागने लगते हैं। कई बार तो लावारिस कुत्ते टहलते हुए अस्पताल की तीसरी व चौथी मंजिल तक पहुंच जाते हैं। जिला नागरिक अस्पताल में हुई स्वास्थ्य कल्याण समिति की बैठक में पीएमओ ने नगर निगम के अधिकारियों को अस्पताल से कुत्ते पकड़ कर कहीं और छोड़ने काे कहा तो उन्होंने एक ही रटा सा जवाब दिया कि उनके पास न बजट है और न ही स्टाफ।
उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अब कुत्तों को एक जगह से पकड़ कर कहीं दूसरी जगह नहीं छोड़ने सकते। यदि कुत्तों की नसबंदी करते हैं तो इसके बाद उन्हें वहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। यानी नसबंदी करने के बाद कुत्तों की संख्या पर तो कुछ हद तक अंकुश लग जाएगा, लेकिन यह लोगों को ऐसे ही काटते रहेंगे।
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि अस्पताल परिसर में काफी संख्या में कुत्ते घूम रहे हैं। इन्हें पकड़ने के लिए नगर निगम के अधिकारियों से कहा था, लेकिन उन्होंने स्टाफ व बजट न होने की बात कही। अस्पताल सार्वजनिक जगह है इसलिए हर समय बहुत भीड़ रहती है। कुत्तों को अस्पताल से पकड़ कर कहीं और छोड़ा जाए।
शहर में घूम रहे हजारों कुत्ते
शहर की गलियों व सड़कों पर हजारों की संख्या में लावारिस कुत्ते घूम रहे हैं। यह कुत्ते रोजाना लोगों को काट कर अपना शिकार बना रहे हैं। जिला अस्पताल में ही रोजाना कुत्ते काटने के औसतन दो लोग पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे हैं। बच्चे जैसे ही दुकान से कोई खाने का सामान लाते हैं या गलियों में खेलते हैं तो कुत्ते इनके पीछे लग कर काट लेते हैं।
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कुत्तों की नसबंदी करने के लिए टेंडर नहीं हो पाया है। नियमानुसार कुत्तों को एक जगह से पकड़ कर कहीं और नहीं छोड़ सकते। लोगाें की यह समस्या जायज है। - हरजीत सिंह, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर नगर निगम।
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