यदि आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है तो कोरोना लोगों को अपनी जकड़ में तो ले ही रहा है। लेकिन, जिनका दिल कमजोर है तो सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि कोरोना कमजोर दिल वालों को अपनी जकड़ में ले सकता है। जिससे जान भी जा सकती है। ऐसे में हार्ट को मजबूत बनाने की जरूरत है। ट्विनसिटी में हार्ट अटैक से मौत हुई है। यहीं नहीं मौत के बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हार्ट पेशेंट यदि कोरोना से जंग जीत लेता है तो उसके संक्रमित होने के चांस दोबारा रहते हैं। ऐसे में हार्ट मरीजों को कोरोना से काफी सतर्कता बरनती चाहिए।
कोरोना के उपचार के बाद मरीज स्वस्थ तो हो जाता है। लेकिन, शारीरिक रूप से बेहद कमजोर पड़ जाता है। इसके बाद ज्यादा असर रोगी के फेफड़ों, दिल, किडनियों और आंतों पर पड़ सकता है। अमूमन देखा गया है कि ऐसे मरीज ठीक तो हो जाते हैं। लेकिन, इन अंगों की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके बाद अन्य बीमारियों के जकड़ने के चांस अधिक रहते हैं।
शहर के जाने माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.अनुज कांबोज के अनुसार यदि किसी को कोरोना हो जाता है, तो हार्ट की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। मांसपेशियां कमजोर होने के साथ ब्लॉक हो जाती है। जिससे हार्ट अटैक हो जाता है। यहीं नहीं हार्ट बीट पर भी प्रभाव पड़ता है।
चिकित्सकों का कहना है कि कई रिसर्च में सामने आया है कि जिन्हें कोरोना हुआ, उनके दिल के आकार में बदलाव आया है। हालांकि इसके कारणों का अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। इसको लेकर लगातार वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं।
जो लोग स्वस्थ है और उनको कोरोना हो जाता है। तो सर्दी, जुकाम व बुखार आदि के लक्षण होंगे। कई बार तो कोई लक्षण भी नजर नहीं आता है और कुछ दिन बाद ठीक भी हो जाते हैं। लेकिन, हार्ट पेशेंटस को सांस की परेशानी हो जाती है। ऐसे में उनकी जान जाने का खतरा भी अधिक रहता है। कई बार देखा गया है कि परिजन हार्ट अटैक के चलते मरीज को अस्पताल ले जाते हैं। लेकिन, वहां जाकर पता चलता है कि कोरोना के कारण क्लाटिंग हुई है। ऐसे में सावधानी और जागरूकता ही है जो कोरोना से हमें बचाने कार्य करेंगी।