शहर में 1.32 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले कामों के लिए नगर निगम अफसरों को ठेकेदार नहीं मिले। तभी इन कामों के दूसरी व तीसरी बार ई-टेंडर रिकॉल करने पड़े हैं। ऐसे ही पहले भी करोड़ों रुपये से होने वाले अन्य कामों के भी टेंडर रिकॉल हो चुके हैं। किसी टेंडर में एक भी बिड नहीं आई या तय संख्या से कम आई, वहीं कुछ टेंडर में बिड करने वाले ठेकेदार व फर्में के तय नियमों पर खरे नहीं मिल रहे हैं। इस तरह करोड़ों रुपये के विकास कार्य टेंडर में लटके देख वार्ड पार्षद नगर निगम की ई-टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
- वार्ड-22 के गांव गोबिंदपुरा में 6.74 लाख रुपये में स्वागत द्वार का निर्माण।
- वार्ड-19 के गांव ससौली में दस लाख रुपये में चहारदीवारी का निर्माण।
- वार्ड-13 की जम्मे कॉलोनी में 1.12 लाख रुपये में कम्युनिटी सेंटर, शहीद रॉकी हर्बल पार्क व लाडो पार्क में आयरन गार्ड लगाने का काम।
- वार्ड-14 के पुराना हमीदा में 21.34 लाख रुपये में चहारदीवारी का निर्माण।
- वार्ड-10 में नगर निगम स्टोर में 9.58 लाख रुपये में गेट नंबर-2 पर चहारदीवारी का निर्माण।
- वार्ड-10 के आजाद नगर में 48.53 लाख रुपये में मेहता किरयाना स्टोर से यमुना नहर की पटरी तक एनपी-2 पाइप बिछाने व किरयाना स्टोर से शन्नो के घर तक आईपीबी गली का निर्माण।
- वार्ड-11 में तेजली खेल स्टेडियम समीप महादेव बिल्डिंग सप्लायर की दुकान से श्रीराधे प्लाईवुड तक 35 लाख रुपये में एनपी-2 पाइप बिछाने सहित रोड का निर्माण।
वार्ड-3 से हरमीन कोहली, 4 से देवेंद्र सिंह, 8 से विनोद मरवाह ने कहा कि बीते चार साल का कार्यकाल में वार्डों के काम जमीन पर कम और कागजों में अधिक दिखे। क्योंकि कई कई माह ई टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, जिसकी वजह टेंडर प्रक्रिया का प्रचार प्रसार न किया जाना है। टेंडर की विज्ञप्ति न तो समाचार पत्रों में दी जाती है और न टेंडर की प्रति सदन में मंजूर किए प्रस्ताव अनुसार वार्डों के पार्षदों को भेजी जा रही है। अब बहुत कम कार्यकाल शेष है और वार्डों में होने वाले जरूरी काम अधिक हैं। ऐसे में टेंडर का अधिक से अधिक प्रचार कर उन्हें सिरे चढ़ाया जाना चाहिए। ये मांग आगामी सदन बैठक में भी होगी।
टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है। जरूरी कामों के टेंडर लगाए जा रहे हैं। नियमों के तहत बिड न मिलने पर टेंडर रिकॉल किए जाते हैं।- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।