संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। बूड़िया के मीठा कुआं समीप चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास संजय चतुर्वेदी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि प्रेम ऐसा धागा है, जो जीव को ईश्वर से जोड़ता है। प्रेम नहीं तो कुछ भी नहीं। उन्होंने बताया कि दिखावा करना प्रेम नहीं होता और स्वयं को पुजवाना भी प्रेम नहीं है।
उन्होंने कहा कि भक्ति तो वह है, जो निर्जन वन में जाकर ध्रुव ने की थी। भक्ति तो वह है, जो प्रह्लाद ने की, जिन्होंने अपनी मृत्यु का भय सिर पर मंडराता देखकर भी भगवत चर्चा को नहीं छोड़ा। भक्ति में निश्चल प्रेम होता है और जो प्रेम होता है वही भक्ति का सार है। प्रेम से ही भगवान प्रकट हो जाते हैं और भक्तों के कष्टों को हर लेते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसा सुंदर तन पाकर मानव भगवान को भूल जाता है और अन्य जगह आनंद की खोज करता है। जो आनंद भगवान में है, वह कहीं नहीं है। भगवान हर प्रकार से जीव की सहायता करते हैं, पर मनुष्य को लगता है कि शायद मैं किसी की सहायता कर रहा हूं। जीव किसी की सहायता करें तो वह तो मानवता है। कथा में राम अवतार, भूषण कांबोज, ईशम सिंह, जय सिंह व अन्य लोग मौजूद रहे।