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Yamuna Nagar News: फूड इंस्पेक्टर पर चार जिलों का कार्यभार, सैंपल लेने का कार्य प्रभावित

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यमुनानगर। कुरुक्षेत्र के फूड इंस्पेक्टर अमित चौहान के पास यमुनानगर के अलावा पंचकूला और करनाल का अतिरिक्त कार्यभार है। जिससे चारों जिलों में सैंपल लेने का कार्य प्रभावित हो रहा है। पिछले 26 माह में खाद्य पदार्थों के 21 सैंपल अनसेफ आ चुके हैं। वहीं नियमित सैंपलिंग न होने का फायदा मिलावट करने वाले उठा रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में जिले में विभिन्न दुकानों से खाद्य पदार्थों के कुल 221 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 12 सैंपल सब स्टैंडर्ड पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा 2024-25 में कुल 127 सैंपल लिए गए, जिनमें से आठ सब स्टैंडर्ड पर खरे नहीं उतरे और एक फेल आया। फूड इंस्पेक्टर न होने से पिछले वर्ष लगभग आधे ही सैंपल लिए जा सके। जब कहीं से सैंपल लेना होता है तो वहां पर फूड इंस्पेक्टर का मौके पर जाना जरूरी होता है। इंस्पेक्टर ही बताता है कि कौन से पदार्थों के सैंपल लेने हैं। इसके अलावा कागजी कार्रवाई भी उन्हें ही पूरी करनी होती है। चारों जिलों का कार्यभार देखने के कारण फूड इंस्पेक्टर का सप्ताह के पांच कार्यदिवस में हर जिले में मुश्किल से एक ही दिन आना होता है। इसके अलावा कोर्ट केस व मुख्यालयों में बैठक में जाना हो तो सारे कार्य प्रभावित हो जाते हैं।
त्योहारों में आती है सबसे ज्यादा दिक्कत
सालभर में सबसे ज्यादा सैंपल लेने का कार्य त्योहारों में प्रभावित होता है। उस वक्त सभी जिलों में खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने होते हैं। सभी का प्रयास यही रहता है कि इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा सैंपल लिए जाएं पर कम सैंपल लिए जाते हैं। ऐसे समय में मिलावट करने वाले बच भी जाते हैं। इसी साल नवरात्र में साढौरा में कुट्टू का आटा खाने से काफी लोग बीमार हो गए थे। ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। लोगों की बीमारी की वजह यह भी रही कि नवरात्र से पहले जिले में कहीं भी कुट्टू का आटा या अन्य पदार्थों का सैंपल लेकर जांच नहीं की गई। वहीं फूड इंस्पेक्टर की ओर से जो सैंपल लिए जाते हैं उनकी जांच चंडीगढ़ स्थित राजकीय फूड लैब में होती है। जहां से रिपोर्ट आने में औसतन 20 दिन का समय लगता है। जब तक रिपोर्ट आती है तब तक खाद्य पदार्थ बिक चुके होते हैं।
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वर्जन:
सालभर जिले से खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जाते हैं। प्रयास यही रहता है कि नियमित सैंपलिंग होती रहे। जिन सैंपल की रिपोर्ट मानकों के अनुसार खरी नहीं उतरती या फिर वह फेल आते हैं उसी आधार पर सरकार द्वारा निर्धारित जुर्माना किया जाता है।
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- अमित चौहान, फूड इंस्पेक्टर यमुनानगर।
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