संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सीएम फ्लाइंग की टीम ने कृषि में इस्तेमाल होने वाले यूरिया के 100 कट्टों से भरी दो ट्रॉलियों को गांव कैत के पास से पकड़ा। जिस ट्रॉली में 85 कट्टे थे, वह औद्योगिक क्षेत्र स्थित विकास यूरिया खाद एजेंसी से लाए गए थे। कलानौर चौकी पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीएम फ्लाइंग इंस्पेक्टर सुखविंद्र सिंह ने थाना सदर यमुनानगर पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि कांसापुर निवासी राशिद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से विकास यूरिया खाद एजेंसी औद्योगिक क्षेत्र से कृषि योग्य यूरिया ग्लू व प्लाईवुड फैक्ट्रियों में सप्लाई करता है। राशिद ने एक व्यक्ति को ट्रैक्टर-ट्रॉली देकर विकास यूरिया खाद एजेंसी से यूरिया लेने के लिए भेजा हुआ है।
यह यूरिया गांव मंडी स्थित बिंद्रा प्लाईवुड फैक्ट्री, शिव गंगा प्लाईवुड फैक्ट्री मंडी, बिंद्रा प्लाईवुड फैक्ट्री गांव दड़वा व कैप्सन प्लाईवुड फैक्ट्री गांव दडवा में अवैध सप्लाई करने के लिए लेकर जाएगा। उनकी टीम विकास यूरिया खाद एजेंसी के सामने कार में बैठ कर निगरानी करने लगे। कुछ समय बाद तिरपाल से ढकी ट्रैक्टर-ट्रॉली निकली। चालक ने कपड़े से चेहरा ढका था।
जब ट्रैक्टर-ट्रॉली गांव कैत से होते हुए मंडी के नजदीक पंहुची तो शक होने पर ड्राइवर ने ट्रैक्टर ट्राली गांव मंडी की तरफ मोड़ दी। ड्राइवर ट्रैक्टर को मंडी गांव में टावर वाली गली में घुस गया और ट्रैक्टर को बंद करके गली में ही छोड़ कर मौका से फरार हो गया। उन्होंने ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में ले लिया। इसकी सूचना उप कृषि निदेशक व थाना सदर यमुनानगर को दी गई।
थाना प्रभारी ने कहा कि यह एरिया कलानौर पुलिस चौकी के क्षेत्र में आता है। कुछ ही देर में कृषि विभाग से एसडीओ अजय कुमार, सब्जेक्ट मैटर स्पेशलिस्ट हरिश पांडे और कलानौर चौकी से एएसआई परमवीर मौके पर पहुंचे। अजय कुमार बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में किसान कृषि योग्य यूरिया खाद है। कट्टों पर प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (नेशनल फर्टिलाइज लिमिटेड बठिंडा पंजाब) अंकित है।
यह यूरिया सरकार द्वारा किसानों को केवल कृषि प्रयोग के लिए उपलब्ध करवाया जाता है। ट्राली में 85 कट्टे यूरिया पाए गए। कृषि विभाग के अधिकारियों ने यूरिया का सैंपल लिया। इसके अतिरिक्त गली के टी-प्वाइंट पर पहले से बिना ट्रैक्टर के खड़ी ट्राली को टीम ने चेक किया तो उसमें कृषि योग्य यूरिया के 15 कट्टे मिले।
इन पर प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (नेशनल फर्टिलाइज लिमिटेड पानीपत (ह.) अंकित था। ग्रामीणों को भी नहीं पता था कि यह ट्राली किसकी है। इस ट्राली से भी यूरिया का एक सैंपल लिया गया। गांव के ही कामिल ने पहले तो कहा कि यह ट्राली उसकी है। बाद में वह ट्राली को अपनी मानने से मना करने लगा। शक के आधार पर कामिल को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।