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आसमान में बादल छाए, आढ़तियों और किसानों की बढ़ी चिंता

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Clouds in the sky, increased concern of farmers and farmers - फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। मौसम में बदलाव देखने को मिलने लगा है। कभी तेज हवा तो कभी आंधी के आसार बन रहे हैं। मंगलवार को आसपास में बादल छाए तो किसानों की चिंता बढ़ गई। खेतों में गेहूं की फसल तैयार खड़ी है तो कुछ किसान फसल को काटकर मंडी में पहुंचा रहे हैं। अचानक मौसम में बदलाव को देखकर आढ़ती भी हैरान नजर आए। मंडी में खरीदे गए गेहूं का अभी उठान नहीं हो पाया है। तो वहीं मंडी में बारिश से बचाने के लिए इंतजाम भी नाकाफी हैं।
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फसल कटाई के सीजन में मंगलवार को मौसम का रुख पलट गया और आसमान में बादल छाए रहे। मौसम में बदलाव को देखकर जहां खेत में किसानों की चिंता बढ़ गई, वहीं मंडी में आढ़ती भी चिंतित हो गए। गेहूं की फसल की कटाई जोरों पर है, जिसके चलते मंडी में आवक भी बढ़ने लगी है। अभी तक लिफ्टिंग का काम पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया है। जिसके चलते मंडियों में गेहूं की फसल खुले में है। वहीं तिरपाल और शेड के नीचे रखने की भी अभी व्यवस्था अधूरी है। बता दें जिले की विभिन्न मंडियों में छह अप्रैल शाम तक पांच हजार क्विंटल से ज्यादा की आवक हो चुकी है।
सरकार की गलत नीतियां बनी परेशानी का सबब
प्रगतिशील किसान व संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य सतपाल कौशिक ने बताया कि सरकार की गलत नीतियां किसानों की परेशानी का सबब बनी हुई है। कई दिनों के बाद मेरी फसल मेरा ब्योरा का पोर्टल खुला था। पोर्टल पर गेहूं की पैदावार प्रति एकड़ 30 क्विंटल निर्धारित की है, जो संभव ही नहीं है, जबकि धान अधिक निकलता है उसकी 25 क्विंटल की थी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पता ही नहीं है कि इस वर्ष गेहूं की पैदावार प्रति एकड़ कितनी होगी। इससे साफ झलकता है कि सरकार पड़ोसी राज्यों से गेहूं मंगवा कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार को पोर्टल में आ रही समस्या को दूर करना चाहिए और जो समय 4 अप्रैल से 6 अप्रैल तक दिया था उसको आगे बढ़ाया जाए। ताकि किसान अपनी फसल का ब्योरा दर्ज करा सके।
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मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिले आढ़ती
रादौर। अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान संजय गुप्ता ने बताया कि आढ़तियों की मांगों को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री मनोहरलाल से मिला है। सीएम को ज्ञापन सौंपकर आढ़तियों ने उनकी मांगें पूरी करने की गुहार लगाई है। आढ़तियों की ओर से सीएम को दिये गये ज्ञापन में मांग की गई कि रबी 2021 में बारदाना पर कोई मार्का न लगाया जाए। इस सीजन जे फार्म की लेबर जे फार्म में से काटी जाए। अनेक मंडियों में धान के लोडिंग जो आई फार्म में न लगने के कारण बकाया है, उसकी पेमेंट जल्दी की जाए। साथ ही आढ़ती की आई फार्म की लेबर जे फार्म के साथ ही आएगी और दामी सीजन खत्म होने के 15 दिन में आएगी। यदि ऐसा नहीं होगा तो उस पर सरकार ब्याज देगी तथा पिछले सीजन पर भी इसी नियम से ब्याज दिया जाएगा।
मंडी के नजदीक के धर्मकांटे का तोल ही मान्य हो। इसके बाद के वजन घटने की जिम्मेदारी आढ़ती की नहीं बल्कि ट्रांसपोर्ट की होनी चाहिए। यदि किसी आढ़ती को इसमें कोई समस्या है तो वह अपनी शिकायत डायरेक्टर फूड सप्लाई के पास जमा करा सकता है। खरीफ 2020 का भुगतान जिस भी गलत खाते में गया है, उसे रिकवर करना सरकार की जिम्मेदारी है। जिन लोगों को उनका पैसा अब तक नहीं मिला है, वह तुरंत दिया जाए। जिन किसानों ने ज्यादा पंजीकरण कराया है, फसल ज्यादा है, परंतु पोर्टल पर कम आ रहा है। इसके लिए भी शिकायत का सेक्शन दिया जाएगा। रबी 2020 की जो पेमेंट ब्याज के रूप में काटी गई थी, वह जल्दी ही आढ़तियों को दी जाए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने आढ़तियों को आश्वासन दिया है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा।
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