200 बेड के सिविल अस्पताल का नया भवन तो बन गया लेकिन इसकी साफ सफाई व रखरखाव स्वास्थ्य विभाग की पीएमओ के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। स्वास्थ्य विभाग के पास इतना भी स्टाफ नहीं है कि वह सारे अस्पताल में दिन में एक बार भी झाडू पोचा लगा सकें। इसकी गवाही अस्पताल के फर्श पर जमी धूल की मोटी परत दे रही है। खासकर नए भवन के जो सबसे ऊपर के दो तल हैं उनमें इतनी धूल जमी पड़ी है कि जिसे देख कर कहना मुश्किल है कि यह अस्पताल है। अस्पताल की साफ सफाई के लिए पीएमओ ने एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन भी खरीदी है। जिसे फिलहाल ट्रायल पर चलाया जा रहा है। हालांकि अभी मशीन की पेमेंट नहीं की गई है।
अस्पताल का पहले पुराना भवन था। यह भवन भी एक मंजिल ही था। वहीं कवर एरिया भी बहुत कम था। जिस कारण दो से तीन सफाई कर्मचारी बड़ी आसानी से अस्पताल में झाडू लगाने के अलावा इसमें पोचा लगा देते थे। वहीं पहले अस्पताल की क्षमता भी केवल 50 बेड की थी। परंतु पुराने अस्पताल को तोड़ कर अब नया भवन बनाया गया है। अब नया भवन चार से पांच मंजिला है। वहीं क्षमता भी 50 से बढ़कर 200 बेड की हो गई है। इसलिए कर्मचारी तो वही हैं लेकिन कवर एरिया कई गुणा ज्यादा बढ़ गया है। जिस कारण अस्पताल की नियमित सफाई नहीं हो रही है। कर्मचारी प्रथम व द्वितीय तल पर तो सफाई कर रहे हैं लेकिन इससे ऊपर के तल धूल फांक रहे हैं। वहां पर धूल की मोटी परत जमी पड़ी है। जबकि अस्पताल में नियमित सफाई होनी चाहिए। क्योंकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को आधी बीमारियां तो इसमें फैली धूल-मिट्टी से ही हो जाएंगी।
मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल की पीएमओ डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि अस्पताल में सफाई कर्मचारियों की कमी है। वहीं अब नया भवन बनने से एरिया बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसलिए साफ सफाई कराने में दिक्कत आ रही है। वीरवार को भी सफाई कर्मचारियों की कमी पूरी करने के लिए पत्र लिखा है। अब कौशल रोजगार निगम के माध्यम से कर्मचारी रखे जा रहे हैं। वहीं सफाई के ट्रायल के लिए इलेक्ट्रॉनिक मशीन खरीदी है। लेकिन यह मशीन भी ओपन एरिया में ही सफाई कर सकती है।