संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मानसून आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, लेकिन शहर में नालों और ड्रेनों की सफाई का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। शहर के अधिकांश बड़े नाले कूड़े, प्लास्टिक और सिल्ट से अटे पड़े हैं। ऐसे में बारिश शुरू होते ही जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। हालात यह हैं कि कई इलाकों में नालों का पानी पहले से धीमी गति से बह रहा है।
नगर निगम क्षेत्र में करीब 32 बड़े और मीडियम साइज के नाले हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 58 किलोमीटर है। इसके अलावा शहर में 340 छोटी ड्रेन हैं, जिनकी लंबाई करीब 134 किलोमीटर बताई जा रही है। इस बार निगम प्रशासन ने पहली बार छोटी नालियों और ड्रेनों की सफाई को भी योजना में शामिल किया है, लेकिन सफाई का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया।
निगम अधिकारियों के अनुसार बड़े नालों की सफाई पर करीब 2.06 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जबकि छोटी ड्रेन और नालियों की सफाई पर लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बावजूद इसके अभी तक शहर में कहीं भी बड़े स्तर पर सफाई अभियान शुरू नहीं हुआ है। कई प्रमुख नालों में सिल्ट जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित हो रही है।
हर साल बारिश के दौरान सड़कों और कॉलोनियों में जलभराव की स्थिति बन जाती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। शहर के कई क्षेत्रों में नालों के किनारे कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। प्लास्टिक और गंदगी के कारण नालों का प्रवाह बाधित हो रहा है। यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो इस बार भी हल्की बारिश में ही सड़कें तालाब बन जाएंगी। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
डीसी ने मांगा था नालों की सफाई का एक्शन प्लान : डीसी ने कुछ दिन पहले नगर निगम के कार्यकारी अभियंता और पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नालों और सीवरेज की सफाई के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया जाए। अधिकारियों को 15 मई 2026 तक सभी कार्य पूरे कराने के निर्देश भी दिए गए थे, ताकि मानसून से पहले शहर में जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त हो सके। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया कि एक्शन प्लान तैयार हुआ या नहीं और यदि बना तो उसमें क्या व्यवस्था की गई है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सफाई कार्य कब शुरू होगा और मानसून से पहले इसे पूरा कैसे किया जाएगा।
हर साल किए जाते हैं दावे : निर्मल चौहान
पूर्व पार्षद निर्मल चौहान का कहना है कि हर साल बारिश से पहले सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस रहती है। यदि समय रहते नालों की सफाई नहीं हुई तो शहरवासियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी। ऐसा पहली बार है जब नालों की सफाई में इतनी देरी की जा रही है। वहीं पूर्व पार्षद नीरज राणा का कहना है कि निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण जलभराव की समस्या लगातार बढ़ रही है। जल्द सफाई शुरू नहीं हुई तो मानसून में दिक्कत हाेगी।
नालों की सफाई जल्द शुरू करवाई जाएगी। इस बार सालभर नालों की सफाई करवाई जाएगी, जिससे बारिश के दौरान सफाई नियमित होती रहे। -सुमन बहमनी, मेयर, नगर निगम यमुनानगर जगाधरी।
दुर्गा गार्डन में गंदगी से अटा नाला। संवाद