जगाधरी। विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास के लिए सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील दिया जाता है। योजना के तहत स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जाता है। मिड-डे-मील में बच्चों को दूध देने का भी प्रावधान है। परंतु काफी दिनों से स्कूलों में बच्चों को यह संपूर्ण आहार नहीं मिल पा रहा है।
बच्चों को देने के लिए स्कूलों के पास दूध नहीं है। वहीं कई स्कूल ऐसे हैं भी जिनके पास दूध गर्म करने के लिए ईंधन व पात्र नहीं हैं। ऐसी आधी अधूरी व्यवस्था से विद्यार्थियों को संपूर्ण आहार उपलब्ध नहीं करवाया जाता सकता है। स्कूल अपने स्तर पर जिला कार्यालय को पत्र भेजकर मांग कर चुके हैं।
मिड-डे-मील योजना के तहत सप्ताह में तीन दिन दिया जाने यह दूध फ्लेवर्ड होता है। इसमें गुलाब, इलायची, वनीला, चॉकलेट और बटरस्कॉच फ्लेवर शामिल हैं। सप्ताह के तीन दिन स्कूल अपने शेड्यूल के अनुसार निर्धारित करते हैं। योजना के तहत बच्चों को मील के दौरान 200 मिलीलीटर दूध दिया जाता है।
जिले में 592 प्राथमिक पाठशाला हैं। जिसमें कुल 41350 बच्चे पढ़ रहे हैं। वहीं, 215 माध्यमिक विद्यालय हैं। जिसमें 30789 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों की कुल संख्या 72139 है। इन सभी विद्यार्थियों को 200 मिली सप्ताह में तीन दिन दूध दिया जाता है। इसके लिए स्कूलों को मिल्क पाउडर दिया जाता है।
कर्मचारी विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार स्कूल में दूध बनाकर वितरित करते हैं। स्कूल प्रभारी इस बारे मेें जिला कार्यालय से मांग कर रहे हैं। दूध न होने की स्थिति में विभाग की ओर से कोई अन्य खाद्य सामग्री मील में शामिल नहीं की गई है। शिक्षक महेंद्र सिंह कलेर, राजीव कुमार, पवन कुमार ने कहा कि दूध न होने की स्थिति में विभाग को अन्य खाद्य सामग्री भोजन में शामिल करनी चाहिए। संवाद
मिल्क पाउडर की सप्लाई आने में थोड़ी देर हो गई थी। अभी सप्लाई आ गई है। सभी स्कूलों को डिमांड के अनुसार दूध उपलब्ध करवाया जा रहा है। जल्द ही सभी स्कूलों में दूध पहुंचा दिया जाएगा। - पिरथी सैनी, उप जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।