रादौर। कच्चा घाट स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के पुजारी कमलेश अवस्थी ने बताया कि 30 मार्च से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होने जा रहा है। शास्त्रों में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व बताया गया है। यह त्योहार वसंत ऋतु में आता है और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित है। नवरात्र का अर्थ है - नौ रातें, जिनमें मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना होती है।
इन पावन दिनों में देवी की उपासना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दौरान मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है।
कमलेश अवस्थी ने बताया कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को शाम 04:27 बजे से 30 मार्च को दोपहर 12:49 बजे तक रहने वाली है। उदिया तिथि के चलते, चैत्र नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च को होगी और इसका समापन 6 अप्रैल को होगा। चैत्र नवरात्र की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना यानी कलश स्थापना के साथ होती है। इस बार चैत्र नवरात्र पर घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त रहेंगे। 30 मार्च को सुबह 06:13 बजे से सुबह 10:22 बजे तक घटस्थापना का मुहूर्त है। उसके बाद दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि पहले दिन - 30 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा, दूसरे दिन - 31 मार्च को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, तीसरे दिन - 01 अप्रैल को मां चंद्रघंटा की पूजा, चौथे दिन - 02 अप्रैल को मां कूष्मांडा की पूजा, पांचवें दिन - 03 अप्रैल को मां स्कंदमाता की पूजा, छठे दिन- 04 अप्रैल को मां कात्यायनी की पूजा, सातवें दिन- 05 अप्रैल को मां कालरात्रि की पूजा, आठवें दिन- 06 अप्रैल को मां गौरी व मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी।