यमुनानगर/जगाधरी में यातायात संचालन के लिए विभिन्न चौक और चौराहों पर लगाए गए ब्लिंकर वाहन चालकों को सचेत नहीं कर पा रहे हैं। आधे से ज्यादा ब्लिंकर तकनीकी खराबी के कारण वर्षों से बंद पड़े हैं और महज शोपीस बनकर रह गए हैं।
लोगों ने भी ब्लिंकरों के काम न करने को लेकर कभी परेशानी महसूस नहीं की, लिहाजा प्रशासन का रवैया भी ब्लिंकरों को लेकर उपेक्षापूर्ण रहा। ऐसे में हाईवे समेत मुख्य मार्गों के चौराहों पर लगे लाखों के ब्लिंकर धूल फांक रहे हैं।
बता दें कि वर्ष 2007-08 में यमुनानगर और जगाधरी में विभिन्न चौक-चौराहों पर करीब 25 जगह सौर ऊर्जा से चलित ब्लिंकर लगाए गए थे। इस कार्य के लिए गुजरात की रश्मि मार्केटिंग कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। इसके तहत सभी जगहों पर ब्लिंकर लगाने के बाद कंपनी ने एक वर्ष तक ब्लिंकरों की मेंटेनेंस का काम किया।
कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद तकनीकी खराबी के कारण आधे से ज्यादा ब्लिंकर बंद पड़ने लगे। नगर निगम ने कुछ समय तक ब्लिंकरों को दुरुस्त किया, लेकिन बाद में इन ब्लिंकरों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। मौजूदा समय में विश्वकर्मा चौक, आईटीआई, वर्कशॉप रोड के समीप, कन्हैया चौक, पंचायत भवन के समीप, जगाधरी में गुलाब नगर चौक, बस स्टैंड के समीप आदि जगहों पर लगे ब्लिंकर खराब पड़े हैं। कई ब्लिंकर बैटरियां गायब होने के कारण, तो कई वाहन की चपेट में आने से बंद हैं।
इसलिए लगाए गए थे ब्लिंकर
प्रशासन की ओर से उन चौक और चौराहों को चिह्नित किया था, जहां ट्रैफिक का दबाव अधिक है और हादसों की आशंका बनी रहती है। ऐसे चिह्नित करीब 25 स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलित ब्लिंकर लगाए गए, ताकि ब्लिंकरों को जग-बुझ होता देखकर दूर से ही चालक सचेत हो जाए कि आगे चौक या चौराहा है और वह समय रहते वाहन की गति को कम कर ले। योजना अच्छी थी, किंतु प्रशासन की उपेक्षापूर्ण रवैये के चलते कारगर साबित नहीं हो पाई।