यमुनानगर। अपराध के पन्नों पर दो से तीन साल में लिखी गई गैंगस्टर भीम की कहानी को जिला पुलिस ने 15 दिन के अंदर खत्म कर दिया।
इसके लिए पुलिस एक से दूसरी कड़ी जोड़ भीम तक पहुंची। हालांकि पुलिस उसे जिंदा पकड़ना चाहती थी, ताकि उससे पूछताछ में गैंग लीडर नोनी राणा व अन्य गुर्गों के बारे में पता लगा पाए। इसके लिए दो व्यापारियों के घर गोलियां चलाने पर भीम पर 20 हजार रुपये का इनाम भी रखा था पर बुधवार सुबह रटौली में भीम पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। इससे एक ओर व्यापारी व आमजन में दहशत कम हुई, पर भीम के घर पर मातम छा गया। भीम की मौत बारे सुनकर परिवार स्तब्ध है। भीम का बड़ा भाई जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचा।
जानकारी के अनुसार 24 वर्षीय भीम शहर के आजाद नगर में गली नंबर चार का रहने वाला था। भीम का परिवार मूल रूप से अयोध्या से यहां आकर रहने लगा था, पर भीम के माता-पिता कई वर्ष पहले यहां से वापस अयोध्या लौट गए थे। भीम अपने दो भाइयों व एक बहन संग रह रहा था।
आजाद नगर की तंग गली से निकले भीम ने तीन साल में अपना नाम अपराध की दुनिया में दर्ज करा लिया। भीम पर यमुनानगर के अलग-अलग थानों में नौ मामले दर्ज हैं। इनमें चार एनडीपीएस एक्ट, एक-एक आर्म्स एक्ट, एक्साइज, चोरी, हत्या के प्रयास, अपहरण के केस हैं। सात मामलों में वह गिरफ्तारी बाद जेल से बाहर था। एक जून के हत्या के प्रयास व अपहरण मामले में उसकी गिरफ्तार होनी थी।
भीम की आजादनगर में ही गली नंबर सात के 18 वर्षीय अमन से दोस्ती थी। अमन के साथ ही भीम ने 14 जुलाई की रात हरबंसपुरा व सरोजनी कॉलोनी फेज-1 में व्यापारियों के घर पर गोलियां चलाई। इस वारदात के बाद भीम व अमन पुलिस की हिट लिस्ट में आ गए। एसपी कमलदीप गोयल ने बुधवार को प्रेसवार्ता में कहा कि जितने भी युवा हैं, जो पहले अपराध में लिप्त रहे हैं, उन्हें व उनके परिवार से अपील है कि विदेश में बैठे लोगों की बातों व लालच में न आएं। अपराध का रास्ता छोड़ दें, नहीं तो कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।