फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yamuna Nagar News: भव से पार लगाती है भागवत कथा

विज्ञापन
विज्ञापन
व्यासपुर। श्री खेड़ा मंदिर प्रांंगण में चल रही साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा का समापन रविवार को हो गया। कथा के समापन के बाद हवन, यज्ञ और भंडारा हुआ। इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए।
विज्ञापन

भागवत कथा काे समापन पर मुख्यातिथि के रूप में एसडीएम व्यासपुर जसपाल सिंह गिल व मुख्य यजमान के रूप में राज कुमार मेहंदीरत्ता, रमेश मेहंदीरत्ता रिंकू मेहंदीरत्ता मौजूद रहे। कथा समापन के बाद कस्बा की सरपंच कीर्ति खुराना सहित गणमान्य लोगों ने हवन किया।
कथा व्यास स्वामी श्यामानंद महाराज ने कहा कि आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा। हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं।
विज्ञापन

श्रीमद् भागवत कथा का उद्देश्य ही परमात्मा के ज्ञान, आत्मा के ज्ञान और सृष्टि विधान के ज्ञान को स्पष्ट करना है। भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है।
श्रीमद् भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथावाचक ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं।
विज्ञापन

मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें