दीपावली पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सभी लोग घर-द्वार सजाकर उनकी पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वीलोक पर वास करती हैं और एक बार अपने भक्तों के घरों में अवश्य जाती हैं। सभी चाहते हैं मां लक्ष्मी का उनके घर में वास हो और सुख संपदा में वृद्धि हो। परंतु दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने की विशेष विधि होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित ललित शर्मा, पंडित वासुदेव, पंडित अमित शर्मा ने बताया कि दिवाली की पूजा का शुभारंभ भगवान गणेश को तिलक लगाकर करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भगवान गणेश को चंद तिलक लगाकर दक्षिणावर्ती शंख से जल व पंचामृत स्नान करवाना चाहिए। चूंकि भगवान गणेश को प्रथम पूज्यनीय का वरदान मिला है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली पर मां लक्ष्मी पृथ्वीलोक पर भ्रमण करतीं हैं। दिवाली के दिन घरों को दीयों से सजाया जाता है। रात को विशेष रूप से मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन पूजन में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार, सिंघाड़ा, कमल पुष्प, लाल गुलाब, लाल चंदन, केवड़ा, इत्र, गन्ना, कमल गट्टा, हल्दी मिठाई इत्यादि सामग्री का प्रयोग करने से मां लक्ष्मी जल्द प्रसन्न होती हैं।
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मां लक्ष्मी सुख-समृद्धि, धन-दौलत और ऐश्वर्य की देवी हैं। मां के प्रसन्न होने से उनका भक्त धनवान व वैभवशाली बन जाता है। जीवन में कभी धन व ऐश्वर्य की कमी नहीं होती। उन्होंने बताया कि मां लक्ष्मी की पूजा में उनके चरण चिन्ह की पूजा होती है। ऐसे में दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा में सोने-चांदी या धातु से बने चरण चिन्ह जरूर रखने चाहिए। यदि सोने-चांदी से बने चरण चिन्ह न रख सकें तो कागज पर बने चरण चिन्ह की जरूर पूजा करनी चाहिए।
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा में शंख का विशेष महत्व होता है। बिना शंख के माता लक्ष्मी की पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिणावर्ती शंक से दिवाली की पूजा करने सेसुख-समृद्धि आती है। मां लक्ष्मी और दक्षिणवर्ती शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। जिस कारण दक्षिणावर्ती शंख को उनका भाई माना जाता है।