संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन में चल रहे चातुर्मास के 59 वें दिन महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने फरमाया कि इस संसार में जितने भी महापुरुष हुए हैं, वह जन्म से महान नहीं हैं। वे अपने जीवन में तप, त्याग, साधना करके महापुरुष बने हैं।
उन्होंने कहा कि आज हमारे साथ कुछ भी गलत होता है हम भगवान को दोष देने लगते हैं कि भगवान यह तूने क्या कर दिया, लेकिन हम यह नहीं सोचते जो हुआ वह भगवान ने नहीं किया बल्कि हमारे कर्मों का फल है। साध्वी ने कहा कि कष्टों, उपसर्गों व संकटों का सामना तो हमारे तीर्थकर भगवान ने भी किया तब ही आत्मा से परमात्मा के पद पर पहुंचे।
परमात्मा बनने के लिए कठोर साधना करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि कल से 27 दिवसीय भगवान पार्श्वनाथ जय अनुष्ठान शुरू होने जा रहा है। भगवान पार्श्वनाथ की साधना करने से रोग शोक दुख दरिद्रता विघ्न बाधा दूर होती है, यह साधना हमें रिद्धि सिद्धि सुख शांति प्रदान करने वाली है इसलिए सभी इसका लाभ लें।
डॉ. साध्वी ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना करने से व्यक्ति को रोग और शोक से मुक्ति मिलती है, ज्ञान और बुद्धिमत्ता की प्राप्ति होती है, आध्यात्मिक विकास होता है और वह आत्म-साक्षात्कार की ओर बढ़ता है, व्यक्ति के पाप कर्मों का नाश होता है और वह आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ता है, व्यक्ति को मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है, व्यक्ति को स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है,व्यक्ति को भक्ति और प्रेम की प्राप्ति होती है।
यह जरूर ध्यान रखें कि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना के फायदे व्यक्ति की श्रद्धा और भक्ति पर निर्भर करते हैं इसलिए महा साध्वी फरमाती हैं कि गुरुओं के शरण में जाकर गुरुओं का आशीर्वाद लेकर सच्चे मन से यदि हम आराधना,धर्म-ध्यान, भक्ति,साधना करते हैं तो उसका लाभ अवश्य ही मिलेगा।