करनाल। अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों के वाणिज्य मंत्री एवं वरिष्ठ अफसरों के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में बासमती चावल निर्यात सीमा को 950 डॉलर प्रति मीट्रिक टन किए जाने का विधिवत एलान किया गया। इसका निर्णय सोमवार रात केंद्रीय मंत्रियों की समिति में किया गया था। भले ही चावल निर्यातकों ने निर्यात सीमा 950 डालर प्रति टन किए जाने का स्वागत किया हो, लेकिन कहीं न कहीं कसक बरकरार है। क्योंकि पिछले सालों के निर्यात का औसत 850 से 900 डालर प्रति टन ही रहा है। अब 950 डालर प्रति टन से अधिक कीमत वाला उच्च गुणवत्ता वाला ही चावल निर्यात हो सकेगा। हरियाणा में बारीक धान के प्रवेश पर रोक से 1509, 1121 आदि किस्मों के भाव और बढ़ने की संभावना है।
वीडियो कॉन्फ्रेस में वाणिज्य मंत्री व अफसरों के साथ भारतीय चावल निर्यातक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाथीराम गुप्ता, पूर्व राष्ट्रीय प्रधान विजय सेतिया, उप प्रधान एवं हरियाणा चावल एक्सपोर्टस एसोसिएसन के राज्य प्रधान सुशील जैन के साथ-साथ कई बड़े निर्यातक भी जुड़े थे। पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने विधिवत तरीके से बासमती चावल निर्यात सीमा को 950 डालर प्रति टन किए जाने का एलान कर दिया है। उन्होंने बताया कि ये सही है कि पिछले सालों का बासमती चावल निर्यात देखें तो औसत तो करीब 850 से 900 डॉलर प्रति टन पड़ा है। संघ ने यही मांग भी वाणिज्य मंत्री के सामने रखी, लेकिन ग्रुप ऑफ मिनिस्ट्री ने जो निर्णय लिया है, वह सोच समझ कर ही लिया होगा, इसलिए निर्यातक संघ इस निर्णय का स्वागत करता है।
हरियाणा राइस एक्सपोटर्स एसोसिएशन के राज्य प्रधान सुशील जैन ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंस में निर्यातकों ने अपनी कई तरह की निर्यातक संबंधी समस्याओं व आशंकाओं को भी रखा, जिन पर वाणिज्य मंत्रालय के अफसरों ने सकारात्मक तरीके से समाधान बताया और निर्यात में सहयोग का भरोसा दिया है। इसलिए सभी निर्यातकों ने एक स्वर में निर्यात सीमा को घटाकर 950 डालर प्रतिटन किए जाने का स्वागत किया है। इससे उच्च गुणवत्ता का चावल विदेशों को निर्यात हो सकेगा।
बारीक धान के भाव बढ़े
बासमती निर्यात सीमा तय होने और हरियाणा सरकार द्वारा 1509 व 1121 आदि बारीक धान की किस्मों के धान पर हरियाणा में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के कारण 1509 व 1121 की धान के भाव 2700, 2800 से बढ़कर अब 3300 से 3550 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। क्योंकि निर्यातकों ने खरीद शुरू कर दी, दूसरी ओर हरियाणा की मंडियों में बाहरी 1509 की आवक बंद होने से धान की कमी पड़ने लगी है। जिसके कारण अभी और भाव बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि 1509, 1121 को स्थानीय चावल कारोबारी और राइस मिलर्स भी खरीद रहे हैं।