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Yamuna Nagar News: आबादी के लिहाज से रोडवेज की 300 बसों की जरूरत, उपलब्ध सिर्फ 160

Mon, 19 Jan 2026 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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हरियाणा रोडवेज बस। आर्काइव - फोटो : महसी के बसौनामाफी में वन विभाग द्वारा पकड़ा गया बाघ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले की आबादी 13,85,375 को पार कर चुकी है, लेकिन इसके मुकाबले यमुनानगर रोडवेज का बस बेड़ा बढ़ने की बजाय लगातार सिकुड़ता जा रहा है। मौजूदा समय में डिपो में कुल 160 बसें हैं, जिनमें से रोजाना औसतन 150 बसें ही ऑनरूट सड़कों पर दौड़ पा रही हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार डिपो का स्वीकृत फ्लीट 265 बसों का है, जबकि बढ़ती आबादी को देखते हुए जिले में कम से कम 300 बसों की आवश्यकता है। बसों की भारी कमी के चलते रोडवेज डिपो हिचकोले खा रहा है और इसका सीधा असर यात्रियों की सुविधा पर पड़ रहा है।
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बसों की संख्या कम होने के कारण कई रूटों पर पर्याप्त फेरे नहीं हो पा रहे, तो कई रूट ऐसे हैं जिन्हें कवर करना ही संभव नहीं रह गया है। डिपो स्तर पर कई बार बसों की संख्या बढ़ाने के लिए मुख्यालय से पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन हर बार मामला सरकार के पाले में डालकर टाल दिया जाता है। नतीजतन, यात्रियों को लंबा इंतजार, भीड़भाड़ और असुविधाजनक सफर झेलना पड़ रहा है।
बसों की कमी का असर केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है। जिले के 60 ऐसे गांव हैं, जहां हरियाणा रोडवेज की बस सेवा नहीं पहुंच पा रही है। बसों की संख्या कम होने से यात्रियों की संख्या भी लगातार घट रही है। लोग मजबूरी में निजी साधनों या महंगे विकल्पों का सहारा ले रहे हैं।
इससे रोडवेज को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि मौजूदा समय में डिपो से रोजाना 13 से 14 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हो रहा है, लेकिन यात्रियों की घटती संख्या के चलते सरकार के खजाने में जमा होने वाला राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। बसों की कमी का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है। सुबह-शाम दफ्तर, स्कूल-कॉलेज और औद्योगिक क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों को भारी भीड़ में यात्रा करनी पड़ती है।
कई रूटों पर बसें समय पर नहीं पहुंचतीं, जिससे यात्रियों को देर से गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई बार बस में खड़े होकर या दरवाजों पर लटक कर सफर करना मजबूरी बन गया है। पर्याप्त सुविधा न मिलने से लोग निजी वाहनों या महंगे साधनों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे यातायात दबाव और बढ़ रहा है।
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डिपो में 265 बसों का फ्लीट है। आबादी के हिसाब से 300 बसें होनी चाहिए। ऑनरूट 150 बसें रहती हैं। हम चाहते हैं बसों की संख्या बढ़े। जल्द ही नई बसें और आएंगी। - संजय रावल, महाप्रबंधक, रोडवेज यमुनानगर।
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