संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। पानी से दोस्ती केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन बचाने की कला भी है। इसी संदेश के साथ जिला तैराकी संघ किशोरों और युवाओं को तैराकी सीखने के लिए प्रेरित कर रहा है। तैराकी ऐसा खेल है, जिसमें खिलाड़ी पदक, पद और पैसा तीनों हासिल कर सकते हैं।
जिला तैराकी संघ के जिला महासचिव अनिल शर्मा कहना है कि सही प्रशिक्षण और मेहनत से युवा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि तैराकी केवल खेल नहीं, बल्कि संपूर्ण शरीर का व्यायाम है। इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, हृदय मजबूत होता है और मानसिक तनाव कम होता है।
नियमित तैराकी करने से शरीर की लगभग सभी मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं, जिससे फिटनेस बेहतर होती है। यही कारण है कि दुनिया के कई बड़े खिलाड़ी अपनी दिनचर्या में तैराकी को शामिल करते हैं। जिले में करीब 200 तैराक हैं, जो विभिन्न तरह की प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं, जो अन्य जिलों की अपेक्षा में कम है। संघ के महासचिव शर्मा ने कहा कि आज जहां मोबाइल व स्क्रीन का आकर्षण युवाओं को शारीरिक गतिविधियों से दूर कर रहा है।
वहीं, तैराकी उन्हें अनुशासन, आत्मविश्वास और साहस सिखाती है। यह खेल बच्चों व युवाओं में निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करता है। विशेष बात यह है कि तैराकी सीखने वाला व्यक्ति आपातकालीन परिस्थितियों में खुद के साथ दूसरों की जान बचाने में भी सक्षम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जिले में अभी भी तैराकी केवल शौक है और अत्याधिक गर्मी में युवा स्वीमिंग पूल इत्यादि में केवल ठंडक व राहत पाने के लिए नहाते हैं। परंतु तैराकी के प्रति लोगों का रुझान अपेक्षाकृत कम है, जबकि यह खेल सुनहरे भविष्य की दृष्टि से भी काफी संभावनाएं रखता है। सेना, पुलिस, नेवी, खेल विभाग और कई सरकारी सेवाओं में तैराकी का विशेष महत्व है। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरियां और सम्मान भी मिलते हैं।
जिला तैराकी संघ की ओर से युवाओं को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक बच्चे और युवा इस खेल से जुड़कर स्वस्थ जीवन और उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में किशोर व युवा इसके प्रति आकर्षित हो इसके लिए विभिन्न तरीकों से शिक्षण संस्थानों में सभी को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह ऐसा व्यायाम व खेल है, जो हर आयु में सीखा जा सकता है। यह जीवन रक्षण कौशल सभी को अवश्य सीखना चाहिए।