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मनमानी : निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगा रहे विद्यालय

Sun, 29 Mar 2026 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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मॉडल टाउन में दुकान से किताबों की खरीदारी करते अ​भिभावक। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। नए सत्र के लिए निजी विद्यालयों में दाखिले शुरू हो गए हैं। निजी स्कूल प्रबंधक अभिभावकों को किताबों की सूची देकर निर्धारित दुकानों पर भेज रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि एनसीईआरटी की सस्ती व मानक पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने को मजबूर किया जा रहा है।
निजी प्रकाशकों की किताबों की कीमत एनसीआरटी की तुलना में कई गुना अधिक है। एनसीईआरटी की पुस्तकों का उद्देश्य सस्ती, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सामग्री उपलब्ध करवाना है। राजकीय विद्यालयों में पुस्तकें मुफ्त दी जाती हैं। वहीं निजी प्रकाशकों की अपेक्षाकृत एनसीईआरटी की किताबें काफी सस्ती हैं। अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए विवश कर हैं। अभिभावकों का कहना है कि हर साल निजी प्रकाशकों की किताबों के दाम बढ़ जाते हैं।
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वहीं निजी स्कूलों ने बाजारों में दुकानें पहले से ही निर्धारित की हुई हैं। अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। किताबों के नाम पर लूट खुलेआम चल रही है और शिक्षा विभाग कार्रवाई के लिए शिकायत आने का इंतजार कर रहा है।
मामले में उप जिला शिक्षा अधिकारी केएस संधावा का कहना है कि निजी स्कूलों में एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देने का नियम है।
यदि किसी स्कूल की ओर से अभिभावकों पर अनावश्यक रूप से महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, तो इसमें कार्रवाई का प्रावधान है। अभी तक इससे संबंधी कोई शिकायत नहीं आई है। विभाग सतर्क है और निगरानी कर रहा है।
अपने पुस्तक बिक्री केंद्र खोले सरकार

अभिभावक अधिवक्ता साहब सिंह गुर्जर ने कहा कि लोगों की कमाई का मोटा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई में जाता है। हर वर्ष पढ़ाई का बजट बढ़ रहा है। बच्चों के भविष्य के लिए अभिभावकों को समझौता करना पड़ रहा है। निजी स्कूलों की ओर से निर्धारित दुकान से ही किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को दबाव दिया जाता है। ऐसे में सरकार को एनसीईआरटी किताबों के लिए अपने सेंटर खोलने चाहिए।
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सरकार और विभाग करे स्कूलों पर कार्रवाई

हरियाणा एंटी कप्शन सोसायटी के अध्यक्ष अधिवक्ता वरयाम सिंह ने कहा कि विद्यालय निजी प्रकाशकों की किताबें लगा रहे हैं। स्कूलों से अभिभावकों को किताबों की सूची दी जाती है। यह पूरी तरह से सुनियोजित तरीके से किया जाता है। इसके लिए सरकार व विभाग को सख्त नियम बनाने होंगे। नियमों का पालन करने के लिए निरंतर कार्रवाई करनी होगी। सख्त कार्रवाई के बाद ही मनमानी पर अंकुश लगेगा।
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