संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रदेश सरकार के स्वावलंबन पोर्टल ने दिव्यांग लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। पहले पोर्टल चल नहीं रहा था। अब चला तो ऐसा उलट पलट हुआ है कि हर कोई हैरान हो गया है। जो लोग हाथ, पांव या अन्य हड्डी रोग के कारण दिव्यांग थे, पोर्टल ने उन सभी को मानसिक रोगी बना दिया है।
अपडेट होने के बाद पोर्टल में खामियों की भरमार हो गई है। जिस कारण लोगों के न तो दिव्यांगता के प्रमाण पत्र बन पा रहे और न ही रिन्यू हो रहे हैं। दिव्यांगजन मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में प्रमाण पत्रों के लिए रोजाना चक्कर काट रहे हैं। ज्ञात हो कि जिला नागरिक अस्पताल में हर बुधवार को दिव्यांग लोगों का मेडिकल होता है।
हर सप्ताह औसतन 60 से 70 लोगों की मेडिकल जांच होती है। मई माह में एक भी व्यक्ति का दिव्यांगता का प्रमाणपत्र नहीं बना है और जिन लोगों के पहले प्रमाणपत्र बने हुए हैं उनका रिकॉर्ड पोर्टल पर नहीं आ रहा। स्वावलंबन पोर्टल में आई गड़बड़ी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी उन दिव्यांगों की बढ़ी है जिन्हें बचपन से ही पोलियो है या फिर उनका हाथ, बाजू, अंगुली कटी है या फिर काम नहीं करते।
ऐसे लोगों की डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा जांच कर दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। बोर्ड निर्धारित करता है कि पीड़ित कितने प्रतिशत दिव्यांग है। दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर ही लोगों को केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ मिलता है। परंतु पोर्टल ने अब हड्डी रोग से संबंधित सभी लोगों को मंदबुद्धि बना दिया है। इतना ही नहीं दिव्यांगता की जांच जिस डॉक्टर द्वारा की जाती है उसका नाम भी पोर्टल पर नहीं आ रहा। प्रमाण पत्रों में उस डॉक्टर की जगह सिविल सर्जन का नाम लिखा आ रहा है।
डॉक्टर दंपती को भी बनाया दिमागी रोगी
जिले में एक डॉक्टर दंपती भी स्वावलंबन पोर्टल की गड़बड़ी से अछूते नहीं रहे हैं। डॉक्टर पति-पत्नी स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग विंग में कार्यरत हैं। हड्डी रोग के चलते दोनों का पहले से ही 55 व 65 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाणपत्र बन है। अब अब इन दोनों के प्रमाणपत्र में भी गड़बड़ी हो गई है। दोनों डॉक्टर रोजाना अपनी सेवाएं स्वास्थ्य विभाग में दे रहे हैं फिर भी दोनों काे दिमागी रोगी दर्शाया गया है।
दूर कर रहे कमियां : डॉ. पुनीत कालड़ा
स्वावलंबन पोर्टल के नोडल ऑफिसर डॉ. पुनीत कालड़ा का कहना है कि पोर्टल को अपडेट किया गया है। पोर्टल चल तो गया है लेकिन इसमें कुछ कमियां आई हैं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है। उम्मीद है जल्द ही पोर्टल सुचारू रूप से चल जाएगा। इसके बाद दिव्यांगों के प्रमाणपत्र बनने लगेंगे।