जगाधरी। शिक्षक को यदि जीवन निर्माता कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। चूंकि शिक्षक ही बच्चे को नई दिशा प्रदान करता है। भारतीय संस्कृति में गुरु व शिक्षक का दर्जा ईश्वर के बराबर बताया गया है। जिले में कई शिक्षक ऐसे हैं जो अपने इस पेशे का निर्वाह धर्म की तरह करते हैं। वे अध्यापक के अलावा अन्य सामाजिक उन्नति के लिए भी अपना सहयोग कर रहे हैं। ऐसे ही एक शिक्षक गोबिंद सिंह भाटिया हैं। शिक्षाविद होने के साथ गोबिंद सिंह भाटिया साहित्यकार, पर्यावरण मित्र व समाजसेवी हैं। जिससे वे अन्य शिक्षकों व लोगों के लिए नजीर बन चुके हैं।
गोबिंद सिंह भाटिया राजकीय स्कूल में खदरी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक हैं। करीब तीन दशक से वे अध्यापन के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्कूल में पढ़ाना जहां उनका व्यवसायिक पेशा है। वहीं, जरूरतमंदों बच्चों में शिक्षा की अलख जगाना उनका जुनून है। स्कूल में ड्यूटी के बाद वे शहर की स्लम कॉलोनियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने जाते हैं। यही नहीं आज शिक्षक दिवस के मौके पर रेलवे स्टेशन के पास स्थित स्लम बस्ती के चार बच्चों का सरकारी स्कूल में दाखिला करवाएंगे। इस दौरान बच्चों की वर्दी, पढ़ाई, जूते सहित अन्य शिक्षण सामग्री का खर्च वे स्वयं वहन करेंगे। इसके अलावा अन्य सामाजिक कार्य में भी उनकी भूमिका अग्रणी हैं।
गोबिंद सिंह भाटिया ने जिले में जल संरक्षण के लिए अभियान छेड़ा हुआ है। इसके लिए वे अपनी टीम के सदस्यों के साथ तमाम क्षेत्रों में जाकर लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। साहित्यकार होने के कारण वे इस मुहिम में जल का धार्मिक महत्व भी लोगों को बताते हैं, ताकि वे इस दिशा में कदम उठाएं। वे जिले में हजारों पौधे लगा चुके हैं, जिसमें सैकड़ों पेड़ बनकर लोगों को छाया और फल दे रहे हैं। लोगों को पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए जागरूक करने के लिए वे सार्वजनिक स्थानों पर प्रेरक पोस्टर लगाते हैं। पर्यावरण, जल संरक्षण, सामाजिक मूल्य व शिक्षा के महत्व पर उनके कई मौलिक लेख सोशल मीडिया, पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके सराहनीय कार्यों के चलते प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें आजीवन निशुल्क बस यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। संवाद