11 मई को जनता को समर्पित होने वाले मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में चार ऑपरेशन थियेटर बनाए गए हैं। यह चारों ऑपरेशन थियेटर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे। अधिकारियों का कहना है कि पीजीआई व बड़े अस्पतालों के ऑपरेशन थियेटर में जो मशीनें लगी हैं, ठीक वैैसी ही जिले के सिविल अस्पताल में लगाई गई हैं। टेक्नीशियन ऑपरेशन थियेटर को अंतिम रूप देने में लगे हैं। चारों ऑपरेशन थियेटरों को पूरी तरह से ऑटोमेटिक, बैक्टीरिया मुक्त होने के अलावा वातानुकूलित बनाया गया है। इसके साथ ही अब सिविल अस्पताल में पांच ऑपरेशन थियेटर हो जाएंगे। पांचवा ओटी अस्पताल परिसर में बने ट्रामा सेंटर में बना हुआ है।
यह चारों ऑपरेशन थियेटर अस्पताल के बी-ब्लॉक के चतुर्थ तल पर बनाए गए हैं। चारों ओटी एक ही जगह पर बनाए गए हैं। यहां तक की ऑपरेशन थियेटर के जो दरवाजे हैं उन्हें खोलने के लिए हाथ भी नहीं लगाना पड़ेगा। इनमें सेंसर लगे होने के कारण यह स्टॉफ या डॉक्टर के आने पर अपने आप ही खुल जाएंगे। ओटी में विदेशों से मंगवाई गई सर्जिकल लाइट मशीनें लगाई गई हैं जिनकी मदद से डॉक्टरों को ऑपरेशन करने के दौरान किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
अस्पताल में चारों ऑपरेशन थियेटरों को नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थ केयर (एनएबीएच) की गाइडलाइन के अनुसार बनाया गया है। ऑप्रेशन थियेटर के पास ही हेपा फिल्टर लगा जाएंगे। यह फिल्टर भी ऑटोमेटिक हैं जिन्हें चलाने के लिए हाथ लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हेपा फिल्टर हाथों में लगे छोटे से छोटे कीटाणु को भी सोख लेता है। जिससे ऑप्रेशन के दौरान मरीज को संक्रमण होने का खतरा नहीं रहता। ऑपरेशन थियेटर को पूर्ण रूप से बैक्टीरिया मुक्त रखना होता है।
तीन ब्लॉक में बना अस्पताल नया भवन चार से पांच मंजिला है। ऐसे में मरीजों व उनके तीमारदारों को चौथी व पांचवीं मंजिल तक जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मरीजों की इस परेशानी का ध्यान भी रखा गया है। अस्पताल के तीनों ब्लॉक में कुल 12 लिफ्ट लगाई गई हैं। मरीज को ऑपरेशन के बाद वार्ड में शिफ्ट करने के लिए इन्हीं लिफ्ट से नीचे लाया जाएगा। वहीं डॉक्टरों के आने जाने के लिए लिफ्ट अलग से बनाई गई हैं।
मुकंद लाल जिला अस्पताल का पहला भवन दशकों पुराना था। वह जर्जर हो चुका था। पहले इसकी क्षमता भी कम थी। प्रदेश सरकार ने अस्पताल का नया भवन बनाने की घोषणा की थी। वर्ष 2020 में पुराने भवन को तोड़ कर नया बनाने का काम शुरू हुआ था। इसी दौरान कोरोना महामारी के चलते कुछ माह के लिए काम रोकना भी पड़ा। नए भवन में ए,बी व सी तीन ब्लॉक हैं। जिनमें से दो मरीजों व एक सिविल सर्जन कार्यालय के लिए है। भवन को पूरा करने पर करीब 105 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
पीडब्ल्यूडी (इलेक्ट्रिक विंग) के एसडीओ सुखदेव शर्मा ने बताया कि अस्पताल के चारों ऑपरेशन थियेटरों में इंपोर्टेड अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। ऐसी मशीनें केवल पीजीआई या बड़े प्राइवेट अस्पतालों में ही होती है। यह सुविधा अब लोगों को जिले में ही मिलेगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल 11 मई को अस्पताल का उद्घाटन कर जनता को समर्पित करेंगे। ऐसा अस्पताल आसपास के जिलों में कहीं भी नहीं बना है।