संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए संचालित योजनाओं का असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका लाभ उठाकर कई महिलाएं अब दूसरों को प्रशिक्षण दे रही हैं।
क्लस्टर स्तर पर होने वाली बैठकों में महिलाओं को सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जाती है। महिलाओं को बताया जाता है कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर वे घर से ही रोजगार शुरू कर सकती हैं। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अपने हुनर को आमदनी का साधन बनाने के लिए आगे आ रही हैं।
क्लस्टर फैसिलिटेशन लेवल के माध्यम से भी महिलाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं में न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ी है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उनका आत्मविश्वास मजबूत हुआ है। बैठकों में महिलाएं योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनके लिए पात्रता और आवेदन प्रक्रिया समझ रही हैं और सुविधाओं का लाभ ले रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में कविता, नीलम, प्रवेश रानी, अंजू बाजपेयी, ममता और लक्ष्मी समेत कई महिलाएं प्रशिक्षण लेकर आगे बढ़ी हैं। इन महिलाओं ने प्रशिक्षण के माध्यम से नई गतिविधियां सीखीं और अब अपने अनुभव का लाभ दूसरी महिलाओं को भी दे रही हैं। वे अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं की पूरी जानकारी नहीं थी। क्लस्टर और सीएफएल के माध्यम से आयोजित प्रशिक्षण व बैठकों से उन्हें इन योजनाओं की जानकारी मिली। इससे उनमें अपने दम पर काम शुरू करने का आत्मविश्वास पैदा हुआ।
एनआरएलएम के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर सामूहिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर भी दिए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अपने साथ अन्य महिलाओं को जोड़ रही हैं। इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। साथ ही वे परिवार और समाज में अपनी भूमिका को अधिक मजबूती से निभा रही हैं।