संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यमुना नदी पर पुल की मांग पूरी न होने से खफा टापू माजरी के लोगों ने पूर्ण रूप से गत लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया था। साथ लगते घोड़ो पीपली में भी चुनाव बहिष्कार के ऐलान के चलते नाममात्र ही वोट पड़े थे। उस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह ने मामले में संज्ञान लिया, पर ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के तीन माह में भी पुल निर्माण की कार्रवाई नहीं हुई।
अब विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच दोबारा पुल की मांग को लेकर ग्रामीण एकजुट हैं। दोनों गांव में बैठकें चल रही हैं, जिसमें पुल की मांग कैसे पूरी कराई जाए, इसकी रणनीति बनाई जा रही हैं। दोबारा चुनाव बहिष्कार करने पर भी सभी की राय ली जा रही है। घोड़ों पीपली से सरपंच प्रतिनिधि सुमित ने बताया कि टापू माजरी व घोड़ो पीपली गांव हरियाणा-यूपी की सीमा पर है।
दोनों गांव हरियाणा प्रदेश व यमुनानगर जिले के हैं। दशकों से अपने प्रदेश व जिले से सीधा सड़क संपर्क नहीं है। क्योंकि बीच से यमुना नदी निकल रही है, जिससे दोनों गांवों के लोग यूपी के रास्ते अपने प्रदेश व जिले में आते-जाते हैं। दोनों गांवों से ग्रामीणों को खेतीबाड़ी, उच्च शिक्षा व अन्य कामों के लिए यमुनानगर व हरियाणा के अन्य जिलों में प्रवेश के लिए यूपी के रास्ते करीब 15 से 20 किमी. अतिरिक्त सफर करना पड़ता है।
कहने को गांव से यमुनानगर जिला मुख्यालय की दूरी 12 किमी. है, पर यूपी के रास्ते आने-जाने में 35 किमी. सफर तय करना पड़ता है। इस बीच रास्ते में लूटपाट व अन्य अनहोनी का भय रहता है। इन्हीं परेशानियों से तंग ग्रामीण सात साल से बीबीपुर में यमुना नदी पर पुल की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर कई बार पंचायतें की और डीसी, विधायक व अन्य विभागों के अफसरों से मिले, पर पुल बनना तो दूर इसकी मंजूरी भी नहीं दी गई।
तब गत लोकसभा चुनाव का टापू माजरी में पूर्ण बहिष्कार किया गया, वहीं घोड़ो पीपली में भी विरोध के चलते नाममात्र वोट डाले गए। दोनों गांवों से चुनाव बहिष्कार के एलान पर डीसी, एसपी उन्हें मनाने पहुंचे। चुनाव के तुरंत पुल की मांग पर कार्रवाई के आश्वासन मिले। चुनाव बीते तीन माह होने पर भी कुछ नहीं हुआ। इस कारण ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों की चेतावनी है कि अगर अभी भी पुल बनाने की कार्रवाई न हुई तो ग्रामीण विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार करने का भी फैसला ले सकते हैं।
नाव पर आने-जाने में जान का जोखिम
संदीप कुमार, प्रदीप कुमार, अनिल, देवेंद्र, राजेंद्र ने बताया कि पुल की मांग पूरी न होने पर ग्रामीण यूपी के रास्ते लंबे सफर से बचने के लिए यमुना नदी से नाव पर आने-जाने में जान का जोखिम लेते हैं। क्योंकि नदी में जलस्तर कब बढ़ जाए, यह पता नहीं लगता। साथ ही इस रास्ते कीचड़ व रेत की परेशानी भी झेलते हैं। इसलिए पुल बनाना जरूरी है, जिसके लिए मई में आए डीसी व एसपी को साइट भी दिखा चुके हैं।
डीसी के आदेश पर लोकसभा चुनाव के दौरान ही मौका मुआयना किया था। तब पुल का प्रपोजल बनाकर डीसी के माध्यम से मुख्यालय भेजा गया था। - गुरविंद्र सिंह, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।