बिलासपुर। साढौरा मार्ग पर मृत गाय को दफनाने के लिए सफाई कर्मचारी सुबह से लेकर शाम तक उसे वाहन में लेकर घूमते रहे, परंतु किसी भी व्यक्ति ने उन्हें आसपास दफनाने नहीं दिया। लोगों का कहना था कि मृत गाय से उनके आसपास दुर्गंध फैल जाएगी। प्रशासन लावारिस गोवंश को पकड़ कर गोशाला में तो पहुंचाने में विफल रहा ही है। वहीं एक मृत गाय को दफनाने के लिए बीडीपीओ कार्यालय से लेकर अन्य विभागों का कोई भी अधिकारी केवल 500 रुपये भी नहीं खर्च कर सका। जेसीबी से गड्ढा खुदवाने से लेकर गाय को दफनाने में महज 15 मिनट लगते। यह काम केवल 500 रुपये में हो जाता फिर भी किसी अधिकारी ने सरकारी खजाने से 500 रुपये खर्च करना भी मुनासिब नहीं समझा। नतीजा यह हुआ कि देर शाम को कर्मचारी मृत गाय को वहीं फेंक कर चले गए जहां से उठाकर ले गए थे। जिसको लेकर दुकानदारों व राहगीरों में रोष है।
लोगों ने खंड प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर रोष प्रकट करते हुए कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री व गृह मंत्री को लिखित में शिकायत दर्ज करवाएंगे। साढौरा मार्ग पर कार्य करने वाले दुकानदार हरीश धीमान, संजय शर्मा, रिशिपाल, रोहित, बबलू ने बताया कि अरोग्य क्लीनिक के सामने शुक्रवार रात एक गाय बेसुध अवस्था में पड़ी थी। सुबह जब उन्होंने दुकानें खोली तो गाय मृत अवस्था में मिली। उन्होंने मृत गाय के बारे में तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाया। अधिकारियों ने कर्मचारियों को भेजकर ट्रॉली में मृत गाय को उठवा लिया गया। कर्मचारी सारा दिन गाय को ट्रॉली में लेकर बिलासपुर के आसपास के क्षेत्रों में दबाने व गिराने की जगह ढूंढ़ते रहे, लेकिन हर जगह आसपास के लोगों द्वारा इसका विरोध किया गया। हताश होकर शाम होने पर कर्मचारी दोबारा मृत गाय को उसी जगह पर सड़क किनारे गिरा गए। दुकानदारों का कहना है कि गायों में लंपी बीमारी फैल रही है। लोगों ने प्रशासन से मृत पशुओं के अवशेषों को गिराने के लिए उचित स्थान निर्धारित करने की मांग की है। संवाद