प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक कपाल मोचन मेला का आयोजन बिलासपुर में कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर होता है। लेकिन इस बार मेले का आयोजन 23 से 27 नवंबर तक रहेगा।
इसकी तैयारियों को लेकर प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। यहां बने ऋणमोचन, कपालमोचन और सूरजकुंड सरोवर हैं। इनमें सूरजकुंड सरोवर को पूरी तरह से खाली कर दिया गया है। यहां जमीं गाद को साफ किया जाएगा। इसके अलावा जहां-जहां सरोवर टूटा है उसे दुरुस्त किया जाएगा।
बता दें कपाल मोचन तीर्थ स्थल 126 एकड़ में बसा हुआ है। हर साल मेला चार सेक्टरों लगाया जाता है। जिसमें पंजाब के सबसे ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मेले के दौरान कपाल मोचन स्थल को रंगबिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। हालांकि मेला लगने में अभी दो माह शेष हैं। मगर यहां जो-जो खामियां हैं उन्हें अभी से दुरुस्त किया जा रहा है। उल्लेखनीय है गत दिवस डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने कपालमोचन को दौरा किया था। तब उन्होंने मेले से पूर्व रह गए कार्यों को निपटाने के लिए कहा था।
कपाल मोचन, भारत के पवित्र स्थलों में से एक है। हरियाणा प्रांत के यमुनानगर जिले में स्थित इस तीर्थ के बारे में मान्यता है कि कपाल मोचन स्थित सोम सरोवर में स्नान करने से भगवान शिव ब्रह्मदोष से मुक्त हुए थे। इसी वजह से हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर यहां मेला लगता है जिसमें लाखों लोग पाप मुक्ति के लिए सरोवर में स्नान करने पहुंचते हैं। यह कपाल मोचन मेला के नाम से विख्यात है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगभग 10 लाख श्रद्धालु इन पवित्र सरोवरों में डुबकी लगाते हैं।
पौराणिक तथ्यों के अनुसार 1679 ईस्वी में भंगनी की लड़ाई के बाद पांवटा साहिब के रास्ते पर गुरु गोबिंद सिंह ने भी इस जगह का दौरा किया था। वह 52 दिन तक रुके और पूजा करते थे उनके सैनिक अपने हथियार साफ करते थे और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें परीक्षण करते थे। उन्होंने कपाल मोचन के मुख्य पुजारी को स्मृति चिन्ह के रूप में अपने हस्ताक्षर की तांबे की थाली दी। द्रोपती और पांच पांडवों ने भी इस पवित्र स्थान का दौरा किया था।