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नहर को संक्रमित कर रहा तेजाबी पानी

Thu, 24 Oct 2013 12:27 AM IST
यमुनानगर
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हरियाणा के जिले यमुनानगर में बर्तन फैक्टरियों से निकलने वाले तेजाबयुक्त पानी जिले में बह रही नहरों को प्रदूषित कर रहा है। इस संबंध में न तो खुद फैक्टरी संचालक गंभीर है और न ही जिला प्रदूषण नियंत्रण विभाग।
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जगाधरी की बर्तन फैक्टरियों से प्रतिदिन कितना प्रदूषित पानी निकलकर नहर में जा रहा है इसकी खबर दोनों में से किसी को नहीं है। इससे उनकी गंभीरता का इस बात से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

 प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जगाधरी इंडस्ट्री से 300 केयर पानी निकलता है। यह डाटा कब का है यह वे भी नहीं बता पाए। पश्चिमी यमुना नहर में जगाधरी की सैकड़ों फैक्टरियों का पानी जाता है।
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 इसमें से कुछ फैक्टरियों में तो ट्रीटमेंट प्लांट लगाए हुए हैं, लेकिन ज्यादातर फैक्टरियां ऐसी हैं जहां पर कोई भी ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है और इनसे तेजाबयुक्त और अन्य केमिकल युक्त पानी बिना ट्रीट हुए सीधा नहर में जा रहा है।

इससे नहर जगाधरी क्षेत्र में प्रदूषित पानी की जद में है। प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार 700 फैक्टरियां जगाधरी में हैं। जबकि यहां पर कुछ क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां पर हर घर में फैक्टरी संचालित हो रही है।

इस तरह प्रदूषित होता है पानी
बर्तन फैक्टरी में बर्तन बनाने के लिए जो स्टील आता है वह काली स्टील होता है। पहले तो उस स्टील से बर्तन तैयार किए जाते हैं, उसके बाद उन्हें तेजाब के पानी में धोया जाता है।

लगभग हर फैक्टरी में तेजाब से ही स्टील के बर्तनों को साफ किया जाता है। एक-एक बर्तन को तेजाब में डूबोने के बाद उन्हें पानी में निकाला जाता है। इससे यह पानी तेजाबयुक्त हो जाता है और इसी पानी को कुछ फैक्टरी मालिक बिना ट्रीट किए नालियों में बहा देते हैं, नालियों से होता हुए वह नहर में चला जाता है और नहर के पानी को भी प्रदूषित कर देता है।
 
हमें तो पता ही नहीं कितना पानी लग जाता है
 जगाधरी के लघु उद्योग संचालकों ने तो बर्तनों को तेजाब में धोने के लिए फैक्टरी के बाहर गली में ही ट्रम का टैंक बनाया हुआ है। वहां पर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा हुए है।

बर्तनों को धोने में आप कितना पानी यूज करते हैं इस सवाल पर उन्होंने बताया कि हमारा तो छोटा सा काम है बहुत कम पानी लगता होगा। कितना पानी लगता है इस बारे में उन्होंने बताने में असमर्थता जताई।

 वहीं एक अन्य बर्तन फैक्टरी संचालक ने कहा कि कितना पानी बर्तनों की सफाई में यूज होता है हमने तो कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। बर्तन धोते हुए जब लगे कि पानी ज्यादा गंद हो गया है उसे निकाल कर दूसरा पानी भर लेते हैं।  

सर्वे होना तो जरूरी
पर्यावरणविद एमएल मेहता के मुताबिक कितना प्रदूषित पानी नहर में जा रहा है इसका हर साल का डाटा प्रशासन के पास होना चाहिए। इसके साथ प्रदूषित या ट्रीट किए हुआ पानी नहर में जाने के बाद नहर में पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कितनी हो जाती है।

इसके साथ ही यहां पर कॉलीफार्म का स्तर कितना है इसकी भी जानकारी विभाग को होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि नहर के पानी में ऑक्सीजन का स्तर पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।  
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